सिंधिया राजपरिवार के बीच महा-समझौता पर सुनवाई आज, दिल्ली-मुंबई की अरबों की संपत्तियों समेत जयविलास पैलेस का होगा बंटवारा
ग्वालियर. देश के चर्चित एवं रॉयल राजघरानों में शुमार सिंधिया राजघराने का दशकों पुराना संपत्ति विवाद अब महा-समझौता की तरफ बढ़ रहा है। हाल ही में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ से जिला न्यायालय में एक समझौता आवेदन पेश किया गया है। समझौता प्रस्ताव में सिंधिया राजघराने के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं (राजस्थान की पूर्व मुख्यमत्री वसुंधराराजे, एमपी पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया और ऊषा राजे और अन्य) के बीच अरबों रूपये की शाही विरासतों के बंटवारे पर अंतिम सहमति बन चुकी है।

तमाम दौर की पारिवारिक बैठकों के बाद समझौते का अंतिम मसौदा तैयार कर लिया गया है। जिस पर अब सिर्फ कानूनी मुहर लगना शेष है। इसके लिये ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ से ग्वालियर जिला न्यायालय में आवेदन भी पेश कर दिया गया है। जिस पर 8 जुलाई 2026 को बेहद अहम सुनवाई होने जा रही है। इस ऐतिहासिक महा-समझौते के लागू होते ही दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षो से लंबित एक दर्जन से ज्यादा मुकदमों का सदैव के लिये पटाक्षेप हो जायेगा।
जयविलास पैलेस नहीं… कम्पनियों और ट्रस्ट में बटी है पूरी रियासत
सिंधिया राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां सीधे किसी व्यक्ति के नाम न होकर 1970 के दशक से ‘सर जयाजीराव ट्रस्ट’ और ‘कृष्ण माधव ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के अधीन है। वहीं, दिल्ली की सिंधिया पॉटरीज की जमीन पर बनी 3 अलीशान कोठियों में तीनों बुआयें (वसुंधरा, यशोधरा और ऊषा राजे) में निवास करती है। पूर्व के पारिवारिक बंटवारे में माधवराव सिंधिया को मिली ‘सिंधिया इंवेस्टमेंट प्रायवेट लिमिटेड’ (एसआईपीएल) की कमान वर्तमान में ज्यातिरादित्य सिंधिया संभाल रहे हैं।
राजमाता का ‘पन्ने का शिवलिंग’ अब ज्योतिरादित्य के पास
इस पूरे संपत्ति बंटवारे में सबसे भावुक और आध्यात्मिक पहलू पन्ने (रत्न) का ‘दिव्य शिवलिंग’ है। यह वही बेशकीमती और चमत्कारी शिवलिंग है जिसे राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने आजीवन अपने पास रखा और वे प्रतिदिन सुबह इसकी विशेष आराधना करती थीं। वर्तमान में यह पवित्र शिवलिंग राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के पास सुरक्षित है। हालांकि इसकी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुख्ता सूत्रों का दावा है कि नए समझौते के तहत यह ऐतिहासिक और राजमाता की सबसे प्रिय धरोहर अब उनके पोते केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हिस्से में आने जा रही है।

