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कुछ अधिकारी वर्दी पुलिस की पहनते है लेकिन उनका दिल अपराधियों के साथ है-हाईकोर्ट

ग्वालियर. एमपी में अपराधियों को कानूनी लूप होल (कमियों) का लाभ पहुंचा कर हाईकोर्ट से छुड़ाने वाले और अपनी ड्यूटी में घोर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मंगलवार का तल्खे लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा है कि कुछ पुलिस अधिकारी वर्दी तो कानून की पहनते है। लेकिन उनका दिल अपराधियों के लिये धड़कता है।
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर कोई पुलिस अधिकारी किसी आरोपी को गिरफ्तार करते समय उसकी गिरफ्तारी का लिखित आधार नहीं सौंपता है तो यह माना जायेगा कि उसने आरोपी को हाईकोर्ट से रिहा कराने के उद्देश्य से जानबूझ कर ऐसा किया है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के लिये पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का एक माह के अन्दर सभी थाना प्रभारियों और जांच अधिकारियों के लिये सख्त चेतावनी सर्कुलर जारी करने का अल्टीमेटम दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा रहे पुलिस अधिकारी
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस मुख्यालय भोपाल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्देश (मिहिर राजेश शाह मामला) के पालन में पुलिस मुख्यालय द्वारा इसी साल 13 फरवरी 2026 का एक सर्कुलर जारी किया जा चुका है।
इस सर्कुलर के बावजूद जमीनी स्तर पर थानों में तैनात जांच अधिकारी नियमों को सरेआग ठेंगा दिखा रहे हैं और आरोपियों को बिना लिखित वजह बताये गिरफ्तार कर रहे हैं। जिससे शाति अपराधी तकनीकी आधार पर कोर्ट से बच निकलते हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि यह स्थिति समाज के लिये बेहद खतरनाक है। पुलिस विभाग का काम अपराधियों पर मुकदमा चलाना और निर्दोषों लोगों की रक्षा करना है न कि अपराधियों का कानूनी चोर रास्तों से बचाना है।
गांजा तस्करी के आरोपी भाई को बचाने लगाई थी याचिका
जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने यह तल्ख आदेश धर्मेंद्र लोधी द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता धर्मेंद्र ने दतिया जिले के बसई थाने में दर्ज एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के एक मामले में अपने भाई की गिरफ्तारी को इस आधार पर चुनौती दी थी कि पुलिस ने उसे गिरफ्तारी के कारण लिखित में नहीं दिए थे, इसलिए उसकी गिरफ्तारी अवैध है। हालांकि, जब कोर्ट ने रिकॉर्ड खंगाला तो पाया कि पुलिस ने आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 का लिखित नोटिस दिया था और उसके पास से 86.850 किलोग्राम गांजा जब्त हुआ था। कोर्ट ने इसे कानूनी रूप से पर्याप्त मानते हुए तस्कर भाई को राहत देने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी, लेकिन पुलिस की इस आम ढर्रे वाली कार्यप्रणाली पर गहरा रोष जताया।

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