MP पदोन्नति में आरक्षण पर हाईकोर्ट ने कहा जल्द करेंगे अंतिम निराकरण
जबलपुर. मध्य प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण के बहुचर्चित विवाद पर मंगलवार को हुई सुनवाई ने एक बार फिर लाखों शासकीय कर्मचारियों की निगाहें हाईकोर्ट पर टिका दी हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि इस लंबे समय से लंबित मामले का जल्द अंतिम निराकरण किया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार से उस मौखिक आश्वासन पर भी जवाब तलब किया गया, जिसमें नई प्रमोशन पालिसी लागू नहीं करने की बात कही गई थी।
मामले को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने महाधिवक्ता की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए मामले को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। वहीं, सपाक्स की ओर से जल्द अंतिम सुनवाई की मांग करते हुए कहा गया कि निर्णय आने तक राज्य सरकार को नई पदोन्नतियां करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। विधानसभा सचिवालय में हाल ही में जारी 15 पदोन्नति आदेशों पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई।
अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा
युगलपीठ ने महाधिवक्ता से स्पष्ट करने को कहा कि नई प्रमोशन पालिसी लागू नहीं करने संबंधी मौखिक अंडरटेकिंग की वर्तमान स्थिति क्या है। कोर्ट ने संकेत दिए कि अब इस विवाद को अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा। प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के सेवा हितों से जुड़े इस मामले में हाई कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी आना शेष है। न्यायिक हलचल के बीच कर्मचारियों की नजर अब अगली सुनवाई और अदालत के विस्तृत आदेश पर टिक गई है।

