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जिला प्रशासन की टीम ने ललितपुर के सर्वे नंबर 243-247 की नपाई, मूल रूप से है शासकीय जमीन, फारेंसिंक जांच से बच रहे अधिकारी

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय के लिये आवंटित की गयी बागवानी तथा बॉडी रोड की जमीन को लेकर गंभीर गड़बडी का मामला सामने आया है। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में खुलासा होने के बाद ललितपुर के सर्वे नम्बर 243-247 तक की जमीन मूल रूप से शासकीय थी। लेकिन बाद में रिकॉर्ड में काट-छांट कर निजी नाम दर्ज किये है। वर्ष 1940 -90 तक तेयार किये गये राजस्व अभिलेखों में बाग, नहर और पुल जैसी सार्वजनिक संपत्तियां दर्ज थी। इनमें बाग 31 बीघा 53 बिस्वा, भूमि पर स्थित थाि। जबकि नहर एवं सड़कें भी शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। जिसकी दोपहर 12 बजे से जिला प्रशासन की टीम ने मौके पर नपाई की है।
कलेक्टर रूचिका चौहान के निर्देशानुसार ललितपुर के सर्वे नम्बर 247 एवं ग्राम महलगांव के सर्वे नम्बर 1211 का मौके पर विधिवत सीमांकन कार्य सम्पन्न किया। कुलदीप नर्सरी पर सीमांकन करने के लिये सुबह 10 बजे संयुक्त सीमांकन टीम रोवर मशीन ऑपरेटर राजकिशोर शर्मा के साथ मौके पर पहुंची।
संयुक्त सीमांकन टीम
लश्कर तहसीलदार मनीष जैन, महलगांव तहसीलदार महेश कुशवाह, लश्कर आरआई होतमसिंह यादव, महलगांव आरआई नरेन्द्र सिकरबार, पटवारी केके वर्मा, रीना शर्मा, जाहरसिंह धाकड, सुखलाल इटारिया, शशिकांत शर्मा और श्रीमती पूनम मुहाने आदि की मौजूदगी में कुलदीप नर्सरी आने वाली शासकीय भूमि का सफलतापूर्वक सीमांकन करवाया।
1998 तक तक 31 बीघा जमीन सरकारी
इसके बाद बाग, नहर, पुल सड़क सब हो गये निजी, तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया था कि बाद में रिकॉर्ड में संशोधन कर इन संपत्तियों को निजी स्वामित्व में दर्शाया गया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ दस्तावेजों में हेरफेर कर भूमि उपयेाग और स्वामित्व की स्थिति बदली गयी है।
यह है जमीन का मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड
सर्वे नंबर           जमीन का ब्यौरा                              दर्ज स्थिति
243 17             बीघा                                              पड़ी बंजर
244 12             बीघा                                              बाग
245 18             बीघा 1 विस्वा                                 नहर
246 11              बीघा 1 विस्वा                                 पक्का कदम
247 2               बीघा 15 विस्वा                               नहर
इन रिकॉर्ड्स के अनुसार जमीन पर आम, जामुन, अमरूद, नीम, इमली, गूलर, मुर्रर सिंह भदौरिया, अर्जुन कपूर, दीपक संचेती सहित अन्य नाम दर्ज किए गए हैं। साथ ही यह भी सामने आया है कि इन भूमियों में बाद में प्लॉटिंग और निर्माण किए गए।
तहसीलदार ने लिखा — अभिलेखों में अलग स्याही, अलग लिखावट पर बढ़ाना चाहिए संदेह
तहसीलदार ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि वर्ष 2007, 2008 और 2009 के राजस्व अभिलेखों में अलग-अलग स्याही और लिखावट का उपयोग किया गया है, जिससे रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका और गहरी हो गई है। इस पूरे मामले को विस्तृत जांच का विषय बताया गया है।

 

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