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वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेला -महान क्रांतिकारी सुखदेव के वंशज “क्रांतिवीर परिजन सम्मान” से विभूषित 

देश की रक्षा में शहीद हुए चंबल के सपूत अनूप कुमार के माता-पिता का भी हुआ सम्मान 
बलिदान मेले की तर्ज पर अन्य जिलों में महानाट्य का मंचन कराया जायेगा – श्री देवड़ा 
ग्वालियर – वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेला आयोजन समिति द्वारा इस वर्ष आयोजित किए गए 27वे बलिदान मेले में महान क्रांतिकारी अमर शहीद सुखदेव के वंशज -अनुज थापर को “क्रांतिवीर परिजन सम्मान” से सम्मानित किया गया। अदम्य साहस का परिचय देकर 4 आतंकियों को मारकर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले भिण्ड जिले की अटेर तहसील के ग्राम बड़ेरी निवासी शौर्य चक्र से सम्मानित शहीद अनूप कुमार शर्मा की माताश्री राजेंद्री शर्मा व पिता रामशंकर शर्मा को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया।
बलिदान मेले में महारानी लक्ष्मीबाई पर केन्द्रित महानाट्य के रोमांचकारी मंचन से बड़ी संख्या में मौजूद शहरवासियों के दिलों में देशभक्ति का जज्बा हिलोरे लेने लगा। ज्ञात हो पिछले 27 सालों से बलिदान मेले के संस्थापक अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया के प्रयासों से वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि के सामने वाले मैदान पर बलिदान मेले का आयोजन हो रहा है।
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत माता का स्वाभिमान व गौरव बनाए रखने के लिये महारानी लक्ष्मीबाई ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनकी याद में ग्वालियर में बलिदान मेले का आयोजन सराहनीय पहल है। उन्होंने बलिदान मेला आयोजित करने के लिये राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष  के प्रति साधुवाद व्यक्त किया। बलिदान मेला में आयोजित हुए “खूब लड़ी मर्दानी” महानाट्य की उप मुख्यमंत्री  ने प्रशंसा की। साथ ही कहा कि इस महानाट्य का मंचन प्रदेश के अन्य जिला मुख्यालयों पर कराने के प्रयास पूरी गंभीरता से किए जायेंगे, जिससे युवा पीढ़ी महारानी लक्ष्मीबाई के जीवन चरित्र से परिचित हो और उसे देशभक्ति की प्रेरणा मिले। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि महानाट्य के हर जिले में मंचन के सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा की जायेगी।   आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बलिदान मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज गणेश वंदना के साथ हुआ। क्रांतिवीर सम्मान समारोह में डॉ. हरिमोहन पुरोहित ने शहीदों का प्रशस्ति वाचन किया।
कवि सम्मेलन भी हुआ 
देशभक्ति से ओतप्रोत गरिमापूर्ण बलिदान मेला में सजीव घोड़ों व ऊंटों के साथ शहर के वंदे मातरम् ग्रुप द्वारा वीरांगना लक्ष्मीबाई पर केन्द्रित महानाट्य की प्रस्तुति दी गई। जिसे दर्शकों द्वारा बेहद सराहा गया। इस महानाट्य का मंचन लगभग 250 कलाकारों द्वारा किया गया। कलाकारों की भावों से भरी प्रस्तुति ने बलिदान मेले में बड़ी संख्या में मौजूद शहरवासियों के दिलों में देशभक्ति का जज्बा हिलोरे लेने लगा। साथ ही बहुत से लोगों की आँखे नम हो गईं। ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा मुगल सम्राट से भारत में व्यापार की अनुमति से शुरू हुए इस महानाट्य में वीर शिवाजी की पादशाही, अंग्रेजों के अत्याचार, अमर शहीद मंगल पाण्डे की शहादत, वीरांगना लक्ष्मीबाई का विवाह एवं उसके बाद झांसी राज्य की बागडोर संभालने से लेकर ग्वालियर में देश की बलिवेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने का सजीव चित्रण दिखाया गया। खचाखच भरा बलिदान मेला मैदान महानाट्य के मंचन से उठी देश भक्ति की हिलोरों से सराबोर हो गया।
कार्यक्रम के अंत में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें राष्ट्रभक्ति व हास्य व्यंग से ओतप्रोत कविताओं से प्रांगण गुंजायमान हो उठा। देर रात तक सुधीय नागरिक काव्यपाठ का आनंद लेते रहे।

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