बालाजी सिक्योरिटी बिजली विभाग से ब्लैक लिस्टेड, जीवाजी विश्वविद्यालय से मैन पॉवर हथियाने के लिये दिया झूठा शपथ पत्र
ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय में ब्लैक लिस्टेड बालाजी एजेंसी ने सच्चाई छिपाते हुए अधिकारियों से सांठगांठ कर जेयू में मेन पॉवर का ठेका हथिया लिया है। इस संबंध में कर्मचारी नेता ने जेयू के अधिकारियों से झूठा शपथ पत्र देने के मामले में पुलिस में शिकायत करने की मांग की है। वैसे तो मैन पॉवर और सुरक्षा के नये ठेका को लेकर विवाद बढ़ने की स्थिति बन गयी है। इन्दौर की बालाजी सिक्योरिटी सर्विसेज प्रायवेट लिमिटैड ने एमपीईबी से ब्लैक लिस्टेड होने की सच्चाई छिपाकर सांठ-गांठ कर जीवाजी विश्वविद्यालय मैन पॉवर का ठेका हथियाने का चौंकाने वाला मामले की पोल खुली है।
मध्यप्रदेश राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश सचिव अशोक गोस्वामी ने इसे चालबाज एजेंसी के पूरे कारनाम की पोल खोल दी है। बिजली विभाग से बालाजी सिक्योरिटी को ब्लैक लिस्ट करने की आदेश की सत्यापित प्रति प्राप्त आरटीआई के माध्यम से हासिल की है। इसके अलावा जीवाजी विश्वविद्यालय में इस एजेंसी ने ठेका लेने के लिये झूठा शपथ पत्र दिया था उसकी भी आरटीआई के तहत सत्यापित प्रति हासिल की है।
जेयू में दिया झूठा शपथ-पत्र, आपराधिक मुकदमा दर्ज कराये कुलसचिव
इंटक नेता अशोक गोस्वामी ने जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव को उक्त साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायत देकर बालाजी सिक्योरिटी सर्विसेज प्रायवेट लिमिटेड इन्दौर ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान अहम जानकारी छिपाकर अनुबंिध प्राप्त किया। शिकायत के मुताबिक जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा उक्त कंपनी को विश्वविद्यालय परिसर में सफाई, सुरक्षा एवं मानव बल उपलब्ध कराने का कार्य सोंपा गया है। कुलसचिव को दिये गये पत्र में कहा गया है कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि संबंधित कंपनी के खिलाफ मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यवाही की गयी थी।
शिकायत में इंटक नेता द्वारा आरोप लगाया गया है कि कम्पनी ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान अपने खिलाफ हुई कार्यवाही और तथ्यों का खुलासा नहीं करते हुए झूठा शपथ पत्र में भ्रामक जानकारी दी है। आरटीआई के तहत निकाले गये वह दस्तावेज जो जीवाजी विश्वविद्यालय से छिपाये गये है। शिकायत में यह भी गया कि यदि किसी संस्था द्वारा टेंडर प्राप्त करने के लिये तथ्य छिपाये जाते है तो यह सार्वजनिक व्यवस्था और सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

