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TMC के बागी सांसद NCPI में ही क्यों हुए शामिल

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सभी बागी सांसदों ने रविवार को एनसीपीआई में विलय करने का ऐलान किया है और साथ ही इन सांसदरों ने ममता का साथ छोड़कर भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए को समर्थन देने की भी बात कहीं है। लेकिन सिर्फ पाला बदलना इतना आसान नहीं था।
अगर वह सीधे एनडीए के साथ जाते तो उनकी लोकसभा की सीट जा सकती थी। इससे बचने के लिये उन्होंने एक रास्ता निकाला। इन्होंने एक ऐसी छोटी सी पार्टी में स्वयं को मिला लिया। जिसका नाम शायद ही किसी ने सुना हो। नाम है ‘‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’’ यानी कि एनसीपीआई और इसी के माध्यम से इन्होंने अपनी सांसदी भी बचाई और एनडीए का समर्थन करने की बात कहीं है। ममता बनर्जी जी पार्टी को विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिली। इस हार के बाद से ही पार्टी की कलह खुलकर सामने आने लगी है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस पार्टी के चुनावी पोस्टरों पर कभी लिखा गया था। अपने अधिकार बचाने के लिये राजनीतिक दल बदलुओं को ठुकराइये’’ आज उसी पार्टी में टीएमसी के बागी सांसदों के शामिल होने का दावा किया गया है।
क्या -क्या हुआ रविवार को
श्रविवार को इन बागी सांसदों का दिन बेहत व्यस्त रहा। सबसे पहले यह सभी केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्रसिंह से मिले और इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। एक चिट्ठी दी। इस चिट्ठी में उन्होंने लोकसभा में टीएमसी सांसदों से अलग बैठने की जगह मांगी है। इसके कुछ घंटों बाद इन्होंने एनसीपीआई में विलय का ऐलान किया। एनडीए को समर्थन देने की बात भी कहीं है। बागी गुट यही नहीं रूकना चाहता है। टीएमसी के एक और बागी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने संकेत दिया है कि उनका गुटा जुलाई में यह मांग करेगा कि ‘‘असली टीएमसी’’ का नाम और पार्टी उन्हें मिले। उनका तर्क है कि जब आपके पास पार्टी के दो तिहाई सांसद हों तो आप असली पार्टी होने का दावा कर सकते है। बागी सांसद जगदीश चंन्द्र वर्मा बसुनिया ने पहले कहा था कि वह सोमवार को लोकसभा स्पीकर के पास जाकर असली टीएमसी होने के रूप में मान्यता मांगेंगे।

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