स्वर्णरेखा नदी से जुड़े बांधों का अपग्रेडेशन करेगा जल संसाधन विभाग, डीपीआर आने के बाद ही कार्यवाही शुरू होगी, अतिक्रमण हटायेगा विभाग
ग्वालियर. महानगर ग्वालियर की जीवन रेखा कहीं जाने वाले स्वर्णरेखा नदी को पुनर्जीवित करने के लिये जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) ने एक अहम पहल की है। नदी में जल प्रवाह बहाल करने और जल संग्रहण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वीरपुर, मामा का बांध, हनुमान और गिरवाई बांध के अपग्रेडेशन की तैयारी शुरू कर दी गयी है। यह बांध स्टॉपडेम के रूप में बने है। इस परियोजना के लिये विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) हालांकि तैयार कर ली गयी है। पेमेंट के अभाव में डीपीआर विभाग के सुर्पुद नहीं की गयी है।
इस परियोजना के लिये विस्त्त परियोजना रिपोर्ट तैयार की गयी है। बांधों के सर्वेक्षण और जल संरक्षण से संबंधित विस्तृत योजना बनाने का कार्य भोपाल की एक विशेषज्ञ कम्पनी को सौंपा गया है। कम्पनी एक महीने के अन्दर डीपीआर विभाग को सौंपी जायेगी। जिसके बाद आगे की कार्यवाही और निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा।
WRD हटवायेगा अतिक्रमण
जल संसाधन विभाग की योजना में बांधों का गहरीकरण क्षतिग्रस्त भागों की मरम्मत और जुड़े हुए जल मार्गो व नहरों का सुधार कार्य भी शामिल किया गया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नदी में पूरे वर्षा पर्याप्त जलप्रवाह बना रहें। जल संरक्षण की स्थिति मजबूत हों। स्वर्णरेखा नदी पुर्नजीवन परियोजना को नगर निगम की अमृत 2.0 योजना से भी जोड़ा गया है। इस योजना के तहत नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिये दोनों किनारों पर सीवर लाइन बिछाई जायेगी। शहर के नालों को ट्रैप करके गन्दे पानी को सीधे नदी में जाने से रोका जायेगा। इसके अतिरिक्त नदी और बांधों के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही भी की जायेगी।
नाले का रूप ले चुकी स्वर्णरेखा नदी
पहले इन बांधों से स्वर्णरेखा नदी में स्वच्छ जल का निरंतर प्रवाह बना रहता था। इससे शहर की पेयजल आपूर्ति और आसपास के क्षेत्रों की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती थी। हालांकि, वर्षों की उपेक्षा, अतिक्रमण और गाद जमने के कारण इन बांधों की क्षमता में लगातार गिरावट आई है। परिणामस्वरूप, नदी कई स्थानों पर नाले का रूप ले चुकी है और अधिकांश बांधों की जल संग्रहण क्षमता भी काफी कम हो गई है।

