तेल की कीमत 110 डॉलर के पार, दहशत में दुनिया, नहीं माना ईरान तो होर्मुज में होगी नाटो की एंट्री

नई दिल्ली. अमेरिका -ईरान में कब बात बनेगी। दुनिया इसका इंतजार कर रही है। दूसरी तरफ कच्चे तेल के दाम फिर से दहशत फैलाती नजर आ रही है। ग्लोब टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है। यह सब है यूएस-ईरान के बीच तेल -गैस आवाजाही के लिये सबसे अहम समुद्री रूट होर्मुज ऑफ स्ट्रेट की वजह से जिसे ईरान ने बन्द कर रखा है तो इसके आसपास अमेरिका की नाकाबंदी चल रही है। इस सबसे बड़े संकट को कम करने के लिये अब होर्मुज में नाटो की एंट्री हो सकती है। इसके कुछ सदस्य देशों का अब मानना है कि अगर नाकाबंदी जारी रही है। ईरान न माना तो ऐसा करना आवश्यक हो सकता है। जिससे इस समुद्री रूट से जहाजों की आवाजाही सुचारू करने में मदद मिलेगी।
नाटो का रूख में अचानक बदला
ब्लूमबर्ग ने अपनी नयी रिपोर्ट में मंगलवार का नाटो गठबधन के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनायिकों का हवाला देते हुए बताया है कि नाटो इस बाद पर चर्चा कर रहा है कि अगर ईरान जुलाई की शुरूआत तक स्ट्रेटिजिक समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोलता है। यहां से जहाजों को गुजरने में मदद कैसे की जाये। ये चर्चाये ईरान से जुड़े अमेरिका -इजरायल संघर्ष में प्रत्यक्ष भागीदारी के प्रति कई यूरोपीय सदस्यों के माह के प्रतिरोध के बाद बड़े बदलाव का संकेत है। क्योंकि ट्रम्प के अनुरोध को पहले कई नाटो देशों ने ठुकरा दिया था।
अप्रैल में, नाटो के सहयोगियों ने सार्वजनिक रूप से क्षेत्र में नाकाबंदी अभियान का समर्थन करने के लिए ट्रम्प की अपील को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट की मानें, तो अब इस प्रस्ताव को कई नाटो देशों का समर्थन मिल चुका है, हालांकि अभी तक सर्वसम्मति से सभी का समर्थन नहीं मिला है।
‘अंकारा’ की बैठक में होगा फैसला
Hormuz Strait से होकर दुनिया की कुल जरूरत का करीब 20 फीसदी तेल और गैस की आवाजाही होती है और इसमें आई रुकावट के चलते तमाम देशों में तेल-गैस का संकट गहराया हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, महंगाई भी कोहराम मचाती नजर आ रही है।

