PMO कार्यालय बना सेवा तीर्थ, राजपथ से कर्तव्य पथ बना
नई दिल्ली. सरकार ने इन बदलावों को भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य और सेवा की सोच को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करने से लेकर योजना आयोग को नीति आयोग बनाने तक, देशभर मे नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया लगातार चर्चा का विषय रही है। अब इसी दिशा में एक अहम और ऐतिहासिक बदलाव यह हुआ है कि प्रधानमंत्री ऑफिस (पीएमओ) और उसके आसपास के प्रशासनिक ब्लाक का नाम ‘‘सेवा तीर्थ’’ रखा गया है।
यह नया परिसर पहले एग्जीक्यूटिव इन्कलेब के नाम से जाना जाता था। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनाया गया है। इसी नये भवन परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित होंगे। नया नाम सेवा तीर्थ इसलिये चुना गया है। क्योंकि यह सरकार के कामकाज में ‘‘सेवा की भावना’’ को प्राथमिकता देने का प्रतीक है। यानी शासन केवल सत्ता और अधिकार के लिये नहीं, बल्कि जनता की सेवा और कल्याण के लिये है।
क्या है नया नाम
इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 लागू हो गया है। न्यू क्रिमिनल लॉ (भारतीय न्याय संहिता) 1 जुलाई 2024 से लागू हो गया है। इससे आईपीसी पूरी तरह से बदल गया है। सरकार का कहना है कि पुराने आईपीसी को आधुनिक समय के अनुसार बदलने और भारत की पहचान के हिसाब से नया नाम देने की जरूरत थी।
इंडियन पीनल कोड भी बदल गया नाम
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का नाम बदल चुका है। लेकिन यह सिर्फ नाम नहीं बदलकर पूरी तरह से नयी संहिता में बदल गया है। पुरानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860 जिसे ब्रिटिश शासन केसमय बनाया गया था। आजादी के बाद भी लागू रहा है। अब 1 जुलाई 2024 से यह हटकर नयी संहिता में बदल गया है।

