अमेरिकी सेना ईरान में घुसेगी या होगा सीक्रेट ऑपरेशन
नई दिल्ली. ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मंगलवार को सीनियर अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस बैठक में ईरान की कार्यवाही का जवाब देने के विकल्पों पर चर्चा की जायेगी। यह संकेत माना जा रहा है कि ट्रम्प ईरानी शासन द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की जा रही सख्ती के खिलाफ ठोस कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के सूत्रों के हवाले से बताया बया है कि बैठक में विदेश मंत्री मार्को रूबियों रक्षामंत्री पीट हेंगसेंथ और ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चैयरमैने जनरल डैन केन शामिल होंगे। चर्चा के संभावित विकल्पों में ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंध, सीक्रेटिव सायबर हथियार की तैनाती, सैन्य ठिकानों पर कार्यवाही और सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से सरकार विरोधी आवाजों को मजबूत करना शामिल है।
ईरान द्वारा बातचीत करने की पेशकश का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरानी नेतृत्व ने बातचीत के लिए संपर्क किया है। उन्होंने कहा, “एक बैठक तय की जा रही है. ईरान ने फोन किया है। वे बातचीत करना चाहते हैं.” वहीं ईरान की तरफ से भी कहा गया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमारे विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी विशेष दूत (स्टीव विटकॉफ) के बीच बातचीत का चैनल खुला है और जब भी जरूरत होती है, मैसेज का आदान-प्रदान किया जाता है।”
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार की बैठक में कोई अंतिम फैसला लिए जाने की संभावना कम है, क्योंकि विचार-विमर्श अभी शुरुआती चरण में है. मंगलवार को होने वाली मीटिंग में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो, डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ़्स के चेयरमैन जनरल डैन केन के शामिल होने की उम्मीद है।
अगर अमेरिका ने हमला किया तो…!
इस बीच ईरान की संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने पहले हमला किया, तो ईरान मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा. वहीं अमेरिकी प्रशासन के कुछ अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अमेरिका या इजरायल की खुली कार्रवाई से ईरानी सरकार को यह कहने का मौका मिल सकता है कि प्रदर्शन विदेशी ताकतों की साजिश है।

