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कौन है तालिबान का नूर वली, जिसे पाकिस्तान मारना चाहता है

Noor Wali Mehsud TTP leader

नई दिल्ली. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है। हाल ही में 9 अक्टूबर 2025 को काबुल में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक हुई। जिसमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सरगना नूरवली महसूद को निशाना बनाया गया। कुछ रिपोर्ट्स कहती है कि वह मारा गया, तो कुछ में उसकी मौत की अफवाहें झूठी बतायी गयी। नूरवली महसूद कौन है? क्यों पाकिस्तान उसे मारना चाहता है।
नूरवली महसूद का जन्म और शुरूआती जीवन-एक आम लड़के से उग्रवादी
नूरवली महसूद का जन्म 26 जून 1978 को पाकिस्तान के खैरबर पख्तूनख्वा प्रांत के दक्षिण वजीरिस्तान के तियारजा इलाके में एक छोटे से गांव में हुआ है। वह महसूद कबीले के मेचीखेल उप-कबीले से ताल्लुक रखता है। जो पश्तून जनजाति का हिस्सा है। बचपन में उसने मदरसा सिद्दकीया उस्पास में पढ़ाई शुरू की है।
टीटीपी में ऊंचा पद: कैसे बना सरगना?
2003 में नूर वाली ने पाकिस्तानी तालिबान (टीटीपी) के मेहसूद ब्रांच में शामिल हो गया. वजह? पाकिस्तान की सेना फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरियाज (फाटा) में ऑपरेशन चला रही थी, जिसे वो पश्तूनवाली (पश्तून परंपराओं) का उल्लंघन मानता था. अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ उसने इसे ‘रक्षात्मक जिहाद’ कहा. 2004 में वाना की जंग से शुरू हुई उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान की जंग में उसने पाकिस्तानी सेना पर हमले किए।
ऑपरेशन सिंदूर में दिखी थी ताकत तायार मांजा में घात लगाई. बैतुल्लाह मेहसूद के तहत वो काजी (जज) बना. एक बार तो बैतुल्लाह को तीन दिन की सजा तक सुना दी. उसके बाद बैतुल्लाह का डिप्टी बना. बैतुल्लाह की मौत के बाद 2009 में गोरगोराय में टीटीपी का ट्रेनिंग कैंप चलाया. तब उस पर 20 लाख रुपये का इनाम था।
2013 में टीटीपी के कराची चैप्टर का हेड बना. वहां उग्रवादियों ने फिरौती, किडनैपिंग, बैंक डकैती और हत्याएं कीं. 2015 तक पाकिस्तानी कार्रवाई से नेटवर्क कमजोर हो गया. फिर खालिद मेहसूद का डिप्टी बना और 2018 में खालिद की ड्रोन स्ट्राइक में मौत के बाद मेहसूद तालिबान का लीडर.
फरवरी 2018 में मौलाना फजलुल्लाह का डिप्टी बना. जून 2018 में अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक में फजलुल्लाह मारा गया, तो एक हफ्ते की बहस के बाद नूर वाली को टीटीपी का अमीर (सरगना) चुना गया. उस वक्त टीटीपी कमजोर था – पाकिस्तान में कोई इलाका कंट्रोल में नहीं था. आंतरिक कलह थी लेकिन उसके नेतृत्व में ग्रुप मजबूत हुआ. अब वो सिविलियंस को निशाना नहीं बनाता, सिर्फ सिक्योरिटी फोर्सेस पर हमले करता है।
मुख्य गतिविधियां और किताबें: उग्रवाद का प्रचारक
नूर वली एक धार्मिक विद्वान होने के साथ कमांडर भी है. 1990 के दशक में अफगान सिविल वॉर लड़ी. 9/11 के बाद अफगान तालिबान को सपोर्ट किया. 2007 में बेनजीर भूत्टो की हत्या का श्रेय अपनी किताब में लिया. कहा कि वो अमेरिका से मिलीं हुई थीं. वो टीटीपी के पब्लिकेशन डिपार्टमेंट का हेड था।

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