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पुराना आयकर कानून 1961 की जगह लेगा नया कानून, आज से नया टैक्स कानून लागू, एचआरए सहित 8 नये नियम

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार ने टैक्स की शब्दावली को सुगम बनाने और टैक्स सिस्टम को आसान बनाने के लिये नया टैक्स इनकम टैक्स कानून लागू कर दिया है। जो 1 अप्रैल 202़6 से लागू किया गया है। यह कानून पुराने आयकर कानून 1961 की जगह लेगा और इस कानून के तहत कई नियमों में बदलाव किये गये है। एचआरए क्लेम करने से लेकर आईटीआर डेड लाईन और आईटीआर भरने के लिये ईयर सहित 10 बड़े बदलाव किये हैं। फॉर्म 16 और अन्य इनकम सर्टिफिकेट में भी बदलाव किया है।
नये कानून में तहत क्या-क्या बदलाव किया गया है
1-आईटीआर की डेडलाइन
नये कानून के तहत आईटीआर भरने की डेडलाइन में भी बदलाव किया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 जमा करने के लिये अंतिम डे टमें बदलाव नही किया है। जो कि 31 जुलाई है। लेकिन आईटीआर-3 और आईटीआर-4 के लिये डेडलाइन 31 अगस्त के लिये कर दिया गया है।
2-टैक्स ईयर
आईटीआर भरने के बीच फायनेंशियल ईयर (एफवाय) और असेंसमेंट ईयर (एवाय) को समाप्त कर दिया गया है। इसे सुगम बनाते हुए सिर्फ एक ईयर टैक्स ईयर रखा गया है। पहले फायनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर को लेकर कई कंफ्यूजनप होते थे अब इसे चेंज कर दिया गया है।
3-एफ एंड ओ ट्रेडर्स के लिये अधिक टैक्स
नये कानून के तहत शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिये भी नियम बदला है। सिक्योरिटीज ट्रांसजेक्शन टैक्स (एसटीटी) में वृद्धि के साथ डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग अधिक महंगा होगया है। फ्यूचर और ऑप्शन (एफएंड ओ) के तहत सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शन प्रीमियम पर टैक्स और ऑप्शन पर एक्साइज 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया हे।
3-एचआरए क्लेम के लिये भी नियम
मकान किराया भत्ता (एचआरए) का फायदा पहले की तरह मिलता रहेगा। लेकिन कुछ शर्ते भी रख दी गयी है। कर्मचारियों का ेअब अपने मकान मालिक का पेन कार्ड और किराये के लिये भुगतान का वैध प्रमाण पत्र जमा करना होगा। कुछ प्रकरणोंमें एचआरए का दावा करते वक्त मकान मालिक की पूरी जानकारी जिसमें पैन नम्बर और किराये की राशि भी शामिल है, देना अनिवार्य होगा। एक और बड़ा बदलाव दावे को लेकर हो चुका है। मुंबई, चैन्नई, दिल्ली और कोलकाता के साथ-साथ बेंगलुरू, हैदराबाद, पूणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को भी अब 50प्रतिशत एचआरए छूट की कैटेगरी में रखा गया है। पुराने कानून के तहत मेट्रो शहरों को ही यह फायदा मिलता था। नये कानून के तहत नोएडा और गुरूग्राम जैसी जगहों पर रहने वाले लोग 40 प्रतिशत एचआर पर टैक्स पर छूट क्लेम कर सकते हैं।
4- गिफट और वाउचर पर छूट
कम्पनी के गिफ्ट कार्ड, वाउचर और कूपन पर वार्षिक टैक्स फ्री लिमिट हर कर्मचारी 5 हजार रूपये बढ़ाकर 15 हजार रूपये कर दी गयी है। यह लाभ पुरानी और नयी दोनों टैक्स व्यवस्थाओं के तहत दिया जायेगा।
5- एज्यूकेशन एलाउंस में छूट
पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत बच्चों के भत्तों में बड़ी वृद्धि की गयी है। एज्यूकेशन अलाउंस हर बच्चा 100 रूपये सेबढ़ाकर 63 हजार रूपये प्रतिमाह कर दिया गया है। जबकि छात्रावास अलाउंस 300 रूपये से बढ़कार 9 हजार रूपये प्रति माह कर दिया गया है।
6- शेयर वायबैक पर अलग होगा टैक्स
पहले स्लैब रेट्स पर अनुमानित डिविडेंड के तौर पर टैक्स लगाया जाता था। लेकिन अब कैपिटल गेन के तहत टैक्स लगाया जायेगा। इसका मतलब है कि अब आपको अधिक टैक्स भी देना पड़ सकता है। पर्सनल प्रमोटर्स पर यह लगभग 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा। जबकि कम्पनी के प्रमोटर पर लगभग 22 प्रतिशत का टैक्स लगेगा। रिटेल निवेशक पर होल्डिंग्स टाइम के हिसाब से एसटीसीजी या एलटीसीजी टैक्स लगाया जा सकता हैं।
7- पैन नम्बर में बदलाव
केवल आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड के लिये आवेना अब मान्य नहीं है। आवेदकों को इसके साथ अुछ और दस्तावेज का उपयोग करना होगा। इसके साथ ही एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रूपये से ज्यादा या उससे अधिक के कैश जमा राशि, 5 लाख रूपये कसे ज्यादा वाहनों की खरीद, होटलों या कार्यक्रमों के लिये 1 लाख रूपये से अधिक का भुगतान और 20 लाख रूपये से ज्यादा की अचल संपत्ति लेन-देन पर पैन अनिवार्य कर दिया गया है।
8- इनकम टैक्स फॉर्म
अब फॉर्म 16 की जगह पर फॉर्म 130 दिया जायेगा। फॉर्म 16ए की जगह पर फॉर्म 131, फार्म 26एएस की जगह पर फॉर्म 168, फॉर्म 24क्यू की जगह फॉर्म 138 और फॉर्म 26क्यू की जगह पर फॉर्म 140 दिया जायेगा। इसी तरह से बाकी फॉर्म के नाम में बदलाव किया गया है। हालांकि इनके काम में कोई बदलाव नहीं है। सिर्फ नाम ही चेंज हुआ है।

 

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