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अधिकारी गाँव-गाँव जाकर किसानों व हार्वेस्टर मालिकों को कर रहे हैं जागरूक 

नरवाई जलाने वालों पर लगेगा अर्थदण्ड 
ग्वालियर – नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विस्तृत कार्ययोजना लागू की गई है। इसके तहत व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। राजस्व एवं किसान कल्याण व कृषि विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा गाँव-गाँव में किसानों व हार्वेस्टर मालिकों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही नरवाई जलाने पर कानूनी प्रावधानों के तहत दिए जाने वाले दंड की जानकारी भी दी जा रही है। इस क्रम में मंगलवार को हरसी, सिंघारन व भरथरी सहित डबरा व भितरवार क्षेत्र के अन्य ग्रामों में राजस्व अधिकारी खेतों पर पहुँचे और किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। साथ ही हार्वेस्टर मालिकों को हार्वेस्टर में एसएमएस मशीन लगाने के लिये निर्देशित किया।
किसानों को बताया गया कि खेत में ही वे फसल अवशेष अर्थात नरवाई व पराली जलाने के बजाय इनका वैज्ञानिक प्रबंधन करें। नरवाई जलाने से मृदा की उर्वरता पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है। लाभदायक सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, उत्पादकता घट जाती है और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण एवं भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए नरवाई नहीं जलाएं।
कंबाइन हार्वेस्टर के साथ एसएमएस लगाना अनिवार्य
15 जून तक चलेगा जनजागरूकता अभियान
नरवाई प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए गत 1 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 15 जून तक चलेगा। इसके तहत गाँव-गाँव में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रा रीपर, मल्चर एवं बेलर जैसे कृषि यंत्रों के उपयोग के लिये किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषकगण इन उपकरणों का उपयोग कर फसल अवशेष का वैज्ञानिक प्रबंधन कर सकते हैं।
नरवाई जलाने पर लगेगा अर्थदंड
नरवाई जलाने की घटनाओं की निगरानी जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। नरवाई जलाने पर पर्यावरण संरक्षण के प्रावधानों के अनुसार 2 एकड़ से कम भूमि वाले कृषकों पर 2500 रुपये, 2 से 5 एकड़ तक भूमि वाले कृषकों पर 5000 रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले कृषकों पर 15000 रुपये प्रति घटना अर्थदंड निर्धारित किया गया है।

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