1 अप्रैल से नया कानून होगा लागू-नये इनकम टैक्स में बदलाव एचआरए, वेतन और टैक्स में होगा बदलाव
ग्वालियर. नये फायनेंशिल ईयर शुरू होने के साथ ही 1 अप्रैल से नया आयकर अधिनियम (न्यू टैक्स लॉ 2025) लागू होने जा रहा है। सैलरी टेक्सपेयर्स के लिये एक बड़ा बदलाव है। जिसमें एचआरए, सैलरी स्ट्रक्चर और टैक्स डिडक्शन सहित कई बदलाव हो रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सरकार का उद्देश्य दशकों से अधिक जटिल हो चुके टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है।
सैलरी और एचआरए में बदलाव
वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिये मकान किराया भत्त (एचआरए) टैक्स बचाने के लिये सबसे खास साधनों में से एक माना जाता है। लेकिन नयी व्यवस्था के तहत इसमें एक खास तरह का बदलाव किया गया है। बेंगलुरू, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों का ेअब 50प्रतिशत एचआरए छूट का लाभ मिलेगा। जिससे वह महानगरों के समान फायदा ले सकते है। लेकिन वहीं, दिल्ली एनसीआर में निवासरत लोगों को 40 प्रतिशत तक ही एचआरए के तहत टैक्स डिडक्शन का फायदा दिया जायेगा। यह बदलाव अर्बन सैलरी कर्मचारी के लिये खास हैं क्योंकि इसमें तेजी से डवलप हो रहे शहरों में सैलरी स्ट्रक्चर्स की टैक्सण् क्षमता में बढ़ोत्तरी की गयी है। कम्पनी एचआरए के नये नियम को लागू करने के लिये वेतन फिर से तय कर सकते है। जिससे नयी व्यवस्था के तहत सैलरी स्ट्रक्चर अधिक किफायती हो सकता है नियिोक्ता द्वारा दिया जाने वाला मेडीकल ऋण पर छूट की सीमा को 20 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रूपये का प्रस्ताव हैं जिससे स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय नियोजन में अतिरिक्त राहत मिलेगी।
टैक्स सिस्टम को सुगम बनाना है लक्ष्य
सबसे खास बदलाव में से एक बच्चों से संबधित खर्चो के लिये दी जाने वाली छुूट में वृद्धि की गयी है। बच्चों की एज्यूकेशन अलाउंस अमांउट बढ़ाकर 3 हजार रूपये प्रतिमाह प्रति बच्चा कर दिया गया है। जबकि पहले यह मात्रा 300 रूपये थी। यह खास बदलाव का संकेत है। खासकरि मिडिल क्लास के सैलरी परिवारों के लिये जहां शिक्षा खर्च घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इस कदम से वह डिडक्शन जो पहले नहीं थे। अब टैक्स बचत में शामिल हो चुके है। नये कानून के तहत किये गये संरचानात्मक बदलावों में फायनेंशियत ईयर औरे असेसमेंट ईयर का एक ही टैक्स ईयर में बदल दिया गया है। जिसे अप्रैल से मार्च तक की 12 माह की अवधि के बीच माना जायेगा। इस बदलाव से टैक्स फाइल करना आसान हो गया है। खासकर पहली बार टैक्स रिर्टर्न फायल करने वालों के लिये यह कफ्यूजन दूर हो चुका है। इ सके अलावा सरकार ने उपयोग में सुधार लाने और परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से आयकर रिटर्न (आईटीआर) डॉक्यूमेंट्स को नये सिरे से डिजाइन करके जारी करने की योजना बनाई है।
टैक्स स्लैब में नहीं कोई बदलाव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट 2026 स्पीच में ऐलान किया कि आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, लेकिन टैक्स स्लैब अनचेंज रहेंगे. नए कानून के तहत 2025-2026 के टैक्स स्लैब फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में कमाए इनकम पर लागू होंगे.
नए नियमों से कुछ अनुपालन आवश्यकताओं में भी ढील दी गई है. वाहन खरीद और कैश जमा जैसे लेन-देन में अनिवार्य पैन नंबर बताने की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे छोटे लेन-देनों का बोझ कम हो गया है. साथ ही कैपिटल मार्केट में नियामक निगरानी को मजबूत किया गया है. स्टॉक एक्सचेंजों को अब ये काम करने होंगे…
• 7 सालों तक ऑडिट ट्रेल बनाए रखें.
• लेन-देन के रिकॉर्ड को हटाने से रोकें.
• संशोधित लेन-देन पर मंथली रिपोर्ट जमा करें.
इससे ट्रांसपैरेंसी में सुधार होगा और निवेशकों के हितों की रक्षा होगी.

