एमपी के आउटसोर्स कर्मचारियों का न्यूनतम 21 हजार रूपये वेतनमान की मांग को लेकर प्रदर्शन, नीलम पार्क से एकत्र होंगे

भोपाल. एमपी के सरकारी विभागों, अर्द्धसरकारी संस्थानों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारी रविवार को भोपाल में अपनी मांगों को लेकर शक्तिप्रदर्शन करेंगे। भोपाल के नीलम पार्क में कार्यक्रम की परमिशन शनिवार की रात प्रशासन की ओर से मिली है। इसमें राज्यभर से आउटसोस कर्मचारी शामिल होंगे।
अर्द्ध सरकारी और सरकारी संस्थाओं के कर्मचारी होंगे शामिल
ग्राम पंचायतों के चौकीदार, भृत्य, पम्प ऑपरेटर, सफाईकर्मी, स्कूलों, छात्रावासों के अंशकालीन, अस्थाई कर्मचारी. निगम मंडल, नगरीय निकाय, सहकारिता के आउटसोर्स, अस्थाईकर्मी, शासकीय विभागों के आउटसोर्स कम्प्यूटर ऑपरेटर, अस्पताल, मेडीकल कॉलेजों केआउटसोर्स, सुरक्षाकर्मी समेत चतुर्थ श्रेणी आउसोर्स कर्मचारी, मंडियों, राष्ट्रीयकृत एवं सहकारी बैंकों, उच्चशिक्षा तकनीकी शिक्षा, यूनिवर्सिटी, आयुष विभाग के योग प्रशिक्षक, शिक्षा विभाग के व्यावसायिक प्रशिक्षकों समेत सभी शासकीय अर्द्ध शासकीय विभागें के अस्थाई, आउर्स कर्मचारी, नौकरी में सुरक्षा और न्यूनतम 21 हजार रूपये वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जायेगा।
विभागों का 80% निजीकरण होने से कर्मचारियों का भविष्य संकट में
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आउटसोर्स, अस्थाई, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि मप्र में सरकारी विभागों में ठेकेदारों का राज चल रहा है। सभी विभागों का 80 प्रतिशत निजीकरण हो चुका है। ऐसे में सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी में न सुरक्षा बची है और न ही सरकार का तय न्यूनतम वेतन मिलता है। यह कर्मचारी अन्याय के शिकार हैं। इसी के तहत कामगार क्रांति आंदोलन किया जा रहा है। इसमें प्रदेशभर से हजारों कर्मचारी शामिल होकर न्याय के लिए आवाज बुलंद करेंगे। ग्राम पंचायतों के चौकीदारों, पंप ऑपरेटरों, भृत्यों से 3 हजार में काम कराया जा रहा है। वहीं, स्कूलों छात्रावासों के अंशकालीन, अस्थाई कर्मचारियों का वेतन 2006 के बाद नहीं बढा है। इस कारण उन्हें अब भी 4-5 हजार रुपए वेतन ही मिलता है। आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन से 18% जीएसटी तक काटा जा रही है। न्यूनतम वेतन रिवाइज करके कम कर लिया गया है, यह अन्याय है।

