चारधाम परियोजना का काम प्रारंभ, 12 घंटे की यात्रा 6 घंटे में होगी पूरी, सेना का पहुंचने में होगी आसानी

देहरादून. मनमीत रावत पिछले सप्ताह देहरादून से किसी काम से गोपेश्वर गये थे। वहां से उन्होंने बद्रीनाथ जाने का फैसला किया, लेकिन रास्ते में दर्जनों जगहों पर पहाड़ों को तोड़ा जा रहा है। इस कारण से 10-15 किमी के यात्रा के बाद उन्हें 10 मिनट के लिये रूकना पड़ता था। इससे उन्हें जोशीमठ पहुंचने में देर हो गय और वह उस दिन बद्रीनाथ नहीं जा सके। उनके जैसे कई ऐसे लोग है जिन्हें रात को जोशीमठ में ही बितानी पड़ी।
ऋषिकेश से लेकर बद्रीनाथ के पास भारत के अंतिम गांव माणा तक 300 किमी लम्बे मार्ग को चौड़ा करने के लिये पहाड़ों को काटने का काम इस समय तेजी से चल रहा है। ताकि इस रास्ते का हर मौसम में यात्रा के लायक बनाया जा सके। कोरोना की वजह से इस बार अभी तक उत्तराखण्ड में तीर्थयात्रा पूरी तरह से शुरू नहीं हो सकी है। अभी उत्तराखण्ड के लोगों का ही इसकी अनुमति है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आगामी वर्ष की यात्रा तक इस का अधिकतर काम पूरा हो जायेगा। हालांकि, पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी और हाईकोर्ट में याचिका के कारण से कई काम अटके भी पड़े हैं। इन बाधाओं को दूर करने के बाद ही चारधाम की यात्रा का सुगम बनाया जा सकता हैं।

उत्तराखंड में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को जाने वाले सभी मार्गों को चार धाम यात्रा परियोजना के तहत चौड़ा व सुगम बनाया जा रहा है। 11 हजार 700 करोड़ की इस परियोजना के तहत कुल 889 किमी सड़क को चौड़ा किया जा रहा है। ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक करीब 300 किमी की यात्रा में अभी 10 से 12 घंटे का समय लगता है।

चारधाम परियोजना एक नजर में
ऋषिकेश से बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्रि राजमार्ग को 7 भागों में बनाया जा रहा है। बद्रीनाथ मार्ग को ऋषिकेश से रूद्रप्रयाग और रूद्रप्रयाग से माणा तक 2 भागों बाटा गया है। जबकि, केदारनाथ के लिये रूद्रप्रयाग से गौरीकुण्ड, गंगोत्री केलिये ऋषिकेश से धरासू व धरासू से गंगोत्री और यमुनोत्री मार्ग को धरासू से यमुनोत्री से विभाजित किया गया है। इस मार्ग पर दो सुरंगें व 3 एलीवेटेड रोड़ भी बन रही है। इस सड़क को सीमा सड़क संगठन, लोक निर्माण विभाग, पीआईयू नोर्थ एनआईडीसीएल बना रहे हैं।

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