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MP में भी ऑपरेशन की तैयारी, गुजरात फॉर्मूले पर मध्यप्रदेश में अमल की तैयारी, सर्वे पूर्ण, दिल्ली से मिली हरी झंडी

भोपाल. अभी हाल ही में गुजरात में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में अपनाये गये फार्मूले को 2023 में मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनाया जा सकता है भारतीय जनता पार्टी अब मध्यप्रदेश में भी सत्ता और संगठन में बड़े बदलाव और फेरबदल की के साथ चुनाव में जा सकती है। 5 बिन्दुओं को गुजरात चुनाव में अहम माना जा रहा है। जिस पर मध्यप्रदेश में भी अमल किया जायेगा। दिल्ली में हुई केन्द्रीय स्तर की बैठक के बाद सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। एक सर्वे मध्यप्रदेश में भी हो चुका है जिसमें कुण्डली तैयार कर ली गयी है।
क्षेत्रीय संगठन महामंत्री (मप्र-छग) अजय जम्वाल का फीडबैक आलाकमान तक पहुंच गया है। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश भी शुक्रवार को ग्वालियर पहुंच रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री हितानंद भी रहेंगे। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी मप्र में आने वाले हैं। इन समीकरणों को संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली बैठक में सभी चुनाव वाले राज्यों को कह दिया गया है कि वे पूरी तैयारी में लग जाएं। पार्टी सूत्रों के अनुसार एंटी इनकम्बेंसी सर्वे में साफ दिख रही है। इसलिए कठोरता से टिकट पर कैंची चल सकती है। सभी उम्रदराज व लंबे समय से विधायकों को धीरे-धीरे संकेत दे दिए जाएंगे।
गुजरात विधानसभा चुनाव के फार्मूले पर मप्र में भी अमल की तैयारी
5 साल 37 दिन सीएम रहे विजय रूपाणी के साथ पूरे मंत्रिमंडल को साल भर पहले बदला। एंटी-इनकम्बेंसी चुनाव से पहले भाजपा के पक्ष में बदल गई।
कुल 99 सीटों में से 40% मौजूदा विधायकों के टिकट काटे।
रूपाणी के साथ डिप्टी सीएम रहे नितिन पटेल, प्रदीप जाडेजा, भूपेंद्र सिंह चूडावत और सौरभ पटेल समेत कई उम्रदराज दिग्गजों को घर बैठाया।
पाटीदार और ओबीसी समीकरणों का पूरा ध्यान रखा और नए चेहरे उतारे। अजा-अजजा की रिजर्व सीट के अलावा कुल 40 पाटीदार, 48 ओबीसी, 30 (ब्राह्मण-क्षत्रिय) को टिकट दिया।
पूर्व विधायकों के परिवार के जिताऊ व्यक्ति को टिकट दिया। गुजरात में 22 ऐसे परिवारों को टिकट मिला है।
अब मध्यप्रदेश में भी ऑपरेशन की तैयारी
सत्ता और संगठन में बड़ा बदलाव दिसंबर-जनवरी में संभावित है। मंत्रिमंडल में फेरबदल के संकेत तो पहले से हैं।
भाजपा की 127 सीटें हैं। साफ है कि 45 से 50 विधायकों के टिकट कटेंगे। सूत्रों की मानें तो संख्या बढ़ेगी। नए लोगों को मौका मिलेगा। पिछले चुनाव में 84 नए विधायक बने। इनमें 50 कांग्रेस, 28 भाजपा के थे।
कई नेता 30-40 सालों से सक्रिय हैं, उन्हें ड्रॉप किया जाएगा। उम्र का क्राइटेरिया और रिश्तेदार को टिकट आधार बनेगा।
48% वाेटर ओबीसी हैं। भाजपा ओबीसी और आदिवासी का समीकरण बनाएगी, क्योंकि आदिवासी की 47 सीटें हैं और तीस से ज्यादा सीटों पर उनका प्रभाव है।
एक परिवार एक टिकट की तैयारी है। जिनके बेटा-बेटी या परिजनों को टिकट चाहिए, उन्हें चुनाव से पीछे हटना पड़ेगा।
6 मंत्रियों के साथ चुनाव पहले हो जायेंगे 65 के पार
नागेंद्र सिंह, गुढ़ 81 साल
नागेंद्र सिंह नागौद 80 वर्ष
गोपीलाल जाटव, गुना 75 साल
श्यामलाल द्विवेदी, त्योंथर 74 साल
बिसाहूलाल सिंह, मंत्री 73 साल 2 माह
पारस जैन, उज्जैन उत्तर 73 साल 3 माह
सीताशरन शर्मा, होशंगाबाद 73 साल
गिरीश गौतम, विस. अध्यक्ष 70 साल 6 माह
गोपाल भार्गव, मंत्री 70 साल नौ माह
अजय विश्नोई, पाटन 71 साल तीन माह
गौरीशंकर बिसेन, बालाघाट 71 साल एक माह
रामलल्लू वैश्य, सिंगरौली 72 साल 6 माह
जयसिंह मरावी, जयसिंह नगर 71 साल 9 महीने
महेंद्र सिंह हार्डिया, इंदौर-5 71 साल एक माह
देवीलाल धाकड़, गरोठ 70 साल 9 माह
यशोधरा राजे, मंत्री 69 साल
रामपाल सिंह, सिलवानी 67 साल
करण सिंह वर्मा, इच्छावर 66 साल
इस सूची में मंत्री जगदीश देवड़ा (66) ओमप्रकाश सकलेचा (65) प्रभुराम चौधरी, (65) दिलीप सिंह परिहार (66)नीना वर्मा (66) भी शामिल हैं।

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