महालक्ष्मी के विराजते ही तेज होगा ग्वालियर का विकास

ग्वालियर. महाराज बाड़े से 30 किमी दूर स्थित ऐंती स्थित शनिमंदिर व मंदिर को जौरासी मंदिर महालक्ष्मी (अष्टलक्ष्मी) मंदिर का साथ मिलते ही ग्वालियर की खुशहाली के रास्तें आ रही बाधायें दूर हो जायेगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार ऐसा होने से धन संपदा से संपन्न शहर के नये निर्माण में चार चांद लग जायेंगे। कभी ग्वालियर इन्दौर व मुंबई से अधिक खुशहाल था। जेसीमिल, सिमको ग्वालियर पॉटरीज जैसे विश्व प्रसिद्ध उद्योग थे। लेकिन शहर के वास्तु में परिवर्तन से विकास में रूकावटें आने लगी। वास्तुविदों के मुताबिक भूलाभाई देसाई रोड़ पर 1831 में बनी महालक्ष्मी मंदिर ने मुंबई को संपन्नता के शिखर पर पहुंचा दिया।
लक्ष्मीजी की 8 प्रतिमाओं का हो रहा है निर्माण
मध्यप्रदेश में वहीं चमत्कार इन्दौर में 1832 में होलकर राजपरिवार द्वारा स्थापित कराये गये महालक्ष्मी मंदिर के कारण हुआ। मंदिर के लिये वियतनाम से मार्बल मंगाकर आदिलक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, जय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी की आठ प्रतिमाओं का निर्माण शुरू हो चुका है। भगवान गणेश व माता सरस्वती की प्रतिमायें भी तैयार की जा रही है। इससे पहले राजस्थान के गुलाबी पत्थर से 40 नक्काशीदार मेहराब तैयार किये जा रहे है। 11 करोड़ रूपये की राशि से इस मंदिर का निर्माण लगभग पूरा हो गया है।
म्हालक्ष्मी की मौजदूगी में होगा विकास
ग्वालियर संभाग की प्रभाव राशि कन्या एवं नाम राशि मकर है। इसके स्वामी शनि माने जाते है। अंचल में शनिदेव का मंदिर प्राचीन काल से है। इसका प्रभाव क्षेत्र लगभग 100 किमी तक है। अतः ग्वालियर शनिदेव के प्रभाव में माना जाता है। शनिवदेव को अपने पिता से सूर्य से शत्रुता है। लगभग 2 दशक से ज्यादा पहले से क्षेत्र में सूर्यदेव के मंदिर निर्माण की वजह क्षेत्र में व्यवसाय की गति अवरूद्ध हुई है। वर्षा का अभाव हुआ है। पिता-पुत्र की शत्रुता से क्षेत्र की प्रगति में जो अवरोध पैदा हुआ उसे समाप्त करने के लिये भगवती लक्ष्मी पिता पुत्र के मध्य उनके मंदिर निर्माण व उपस्थिति से क्षेत्र का विकास बढ़ेगा।
पं. विजय भूषण वेदार्थी, ज्योतिषाचार्य
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मंदिर में महालक्ष्मी की प्रतिमा अष्टधातु की 6 फीट ऊंचाई की बनवाई जाएगीं। इसके अलावा मंदिर में धनलक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गजलक्ष्मी, शान्तना लक्ष्मी, वीरा लक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी, विजया लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी स्थापित होंगीं।

हनुमान मंदिर में आने वाले चढ़ावे से हो रहा है निर्माण

ट्रस्ट के अध्यक्ष सुरेश चतुर्वेदी के अनुसार मंदिर के निर्माण में जो खर्च हो रहा है उसकी पूर्ति जौरासी हनुमान मंदिर से आने वाले चढ़ावे से की जा रही है। इसके अलावा किसी से भी मंदिर निर्माण के लिए दान नहीं लिया गया है। मंदिर में एक हॉल का निर्माण भी किया जा रहा है जिसमें धार्मिक कार्यक्रमों का आयाेजन किया जा सकेगा।

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