MP में मेयर.अध्यक्ष को पार्षद नहीं जनता ही चुनेगी, नया अध्यादेश लाने की तैयारी में शिवराज सरकार

भोपाल. मध्यप्रदेश में नगर निगम के महापौर, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष अब सीधे मतदाता चुनेंगे। सरकार OBC आरक्षण को लेकर फंसे पेंच के बीच नगरीय निकायों के चुनाव एक बार फिर प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के लिए नया अध्यादेश लेकर आ रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 13 मई काे देर शाम इसका ड्राफ्ट तैयार कर विधि विभाग को भेज दिया है। मध्यप्रदेश में 2015 तक महापौर-अध्यक्ष के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होते रहे हैं।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में नगर निगम के महापौर और नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से ही होगा। पहले महापौर और पार्षद के लिए अलग-अलग मतदान होता था, लेकिन कांग्रेस ने इस व्यवस्था को बदल दिया। विपक्ष में रहते हुए BJP ने इसका काफी विरोध किया, पर तत्कालीन राज्यपाल ने संवैधानिक व्यवस्था का हवाला देते हुए अध्यादेश और फिर विधेयक को अनुमति दे दी थी। यही वजह है कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से नगर पालिका आलीराजपुर और नगर परिषद लखनादौन का चुनाव कराया जा चुका है।

विधायकों के दबाव में लिया था निर्णय
मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि शिवराज ने नगरीय निकाय चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का निर्णय विधायकों के दवाब में लिया था। यही वजह है कि प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने के अध्यादेश को डेढ़ साल तक विधानसभा में पारित नहीं कराया। दरअसल, सीधे महापौर चुने जाने से स्थानीय राजनीति में उनका कद विधायक से ज्यादा हो जाता है। यदि पार्षद से महापौर चुने जाते हैं तो उसमें विधायकों की भूमिका अहम हो जाती है और महापौर उनके दवाब में रहते हैं।

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