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बकाया वेतन के मामले में हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों की लापरवाही पर 7 लाख रूपये की वसूली का आदेश, सरकार के सभी तर्को को किया खारिज

ग्वालियर. हाईकोर्ट की डबल बेंच ने जल संसाधन विभाग के कर्मचारी के बकाया वेतन के मामले में राज्य सरकार की रिट पिटीशन को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही को स्पष्ट मानते हुए जिम्मेदार अधिकारी से ही 7 लाख रूपये की वसूली करने का आदेश दिया है।
ऐसा मामला विभाग के कर्मचारी राजेन्द्र शर्मा के नियमितीकरण से जुड़े बकाया भगुतान का है। वर्ष 2013 में श्रम न्यायालय ने राजेन्द्र शर्मा को 7 लाख 7 हजार 647 रूपये का भुगतान करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ सरकार ने चुनौती दी थी। लेकिन 2016 में हाईकोर्ट से संशोधन का मौका मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नही हुई। इस केस की पैरवी एडवोकेट बीपी सिंह ने की है।
संशोधन का आवेदन को हाईकोर्ट ने किया खारिज
यहां तक कि 2015 में वसूली प्रमाण पत्र (आरआरसी) जारी होने के बाद भी कलेक्टर स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। कर्मचारी ने 2023 में वसूली प्रक्रिया तेज करने की मांग की, तब जाकर सरकार ने 2024 में संशोधन का आवेदन प्रस्तुत किया। श्रम न्यायालय और औद्योगिक न्यायालय दोनों ने इसे खारिज कर दिया और इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। लेकिन युगल पीठ ने इसे भी खारिज कर दिया।
सरकार के बहाने न्यायालय ने ठुकराये
राज्य सरकार ने अपनी देरी के लिये फाइल गायब होने और कोविड-19 महामारी का हवाला दिया। लेकिन न्यायालय ने इन तर्को को झूठा और भ्रामक करार देते हुए कहा है कि महामारी से पहले ही सरकार 4 साल तक निष्क्रिय रहीं हैं।
हाईकोर्ट ने की टिप्पणी की
अधिकारियों की जानबूझकर की गई देरी और निष्क्रियता स्पष्ट है।
यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है।
नुकसान की भरपाई जिम्मेदार अधिकारी से ही की जाएगी।

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