कोरोना वायरस की जांच अब ग्वालियर की डीआरडीई लैब में
ग्वालियर. मप्र में विदेश से आने वाले कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों की जांच ग्वालियर स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डीआरडीई) में की जायेगी। इसके लिये राज्य शासन के पत्र पर केन्द्र सरकार ने निर्देश जारी किये गये हैं। डीआरडीई के दिल्ली मुख्यालय से कोरोना डिटेक्शन किट मंगाई गयी है। इस किट के आने के बाद ग्वालियर में जांच की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। वर्तमान में कोरोना संदिग्ध मरीज की जांच के लिये गले से स्वाव और बलगम का सैम्पल लिया और इसकी जांच एनआईवी पूणे भेजकर कराई जा रही है। जिसकी रिपोर्ट 5 से 7 दिवस में आ रही है। डीआरडीई में जांच शुरू होने के बाद रिपोर्ट दो दिन में मिल जायेगी।
पूणे की बीआरडीएल लैब से प्रशिक्षण लेकर आये इंवेस्टिगेटर
सीएमएचओ डॉ. एसके वर्मा ने केन्द्रीय मंत्रालय से पत्र मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि डीआरडीई के बीएसएल-3 लैब में कोरोना संदिग्ध मरीज के खून से भी जांच की सकती है। इधर, कोरोना संदिग्ध रोगियों के लिये गजराराजा मेडीकल कॉलेज में बनी बीआरडीएल लैब के प्रिंसीपल इंवेस्टिगेटर डॉ. वैभव मिश्रा, इन्वेस्टीगेटर डॉ रिशिका खेतान को एनआईवी पूणे में एक वीक की ट्रेनिंग दिलाई गयी है।
कोरोना का ऐसे लेते सैम्पल
कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीज का जांच के लिये गले से स्वाव और बलगम का सैम्पल लिया जाता है। सैम्पल लेते समय किट पहनने के साथ डबल हैण्ड ग्लब्स, मास्क लगाने के साथ चेहरा ढंका होना चाहिये। आरटीपीसी आर मशीन में संदिग्ध मरीज के सैम्पल में से वायरस के आरएनए को निकाला जाता है और उसकी संख्या को बढ़ाया जाता है। वायरस की आरएनए के संख्या बढ़ने लगती है तो मरीज को कोरोना वायरस हो सकता है। इसकी जांच अधिक से अधिक जगह हो सके इसके लिये केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा एक सैंकड़ा बीआरडीएल लैब देशभर में खोले गये हैं।

