असमाजिक तत्वों के खिलाफ की जाएगी सख्त कार्यवाही: आईजी

ग्वालियर पुलिस अधीक्षक कार्यालय ग्वालियर के नवीन सभागार में ग्वालियर रेंज के आईजी अंशुमन यादव एवं ग्वालियर रेंज के डीआईजी एमएल वर्मा तथा एसपी नवनीत भसीन द्वारा जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारियों तथा थाना प्रभारियों की आगामी विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए बैठक ली गई। बैठक में सर्वप्रथम पुलिस अधीक्षक ने लंबित स्थाई तथा गिरफ्तारी वारण्टों की तामीली हेतु टीम गठित कर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिये और अवैध शराब, मादक पदार्थ तथा अवैध हथियारों के विरूद्ध अभियान चलाकर प्रभावी कार्यवाही करने के सख्त निर्देश दिये।
पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि आदतन अपराधियों की निगरानी फायल खोली जाकर अधिक से अधिक वाउण्ड ओवर की कार्यवाही की जावे और सामाजिक सौहार्द खराब करने वाले असमाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्यवाही संपादित की जावे। बैठक में आईजीएवं डीआईजी द्वारा जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को परिचय प्राप्त कर आगामी विधान सभा चुनाव तथा त्यौहारों को लेकर उनके द्वारा की जा रही तैयारी के संबंध में जानकारी ली, बैठक मे एसपी द्वारा 363 भादवि अपहरण के प्रत्येक प्रकरण की दस्तयावी पर 10 हजार रूपये का इनाम भी देने की घोषणा की साथ ही उन्होने 4 तथा 6 सितम्बर को सपाक्स संगठन द्वारा किये जाने वाले आन्दोलन में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी समस्त थाना प्रभारियों को दिये तथा उनको शहर का माहौल खराब करने वाले असमाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर कार्यवाही के निर्देश भी दिये।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों से कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए अपने-अपने थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों के खिलाफ वाउण्ड ओवर की कार्यवाही कराना सुनिश्चित करें, उन्होने कहा कि सभी पुलिस अधिकारी अपने-अपने थाना क्षेत्र का भ्रमण करेें और क्षेत्र में आम लोगों से संवाद कायम करें।
जुलूस में किसी भी प्रकार के हथियारों का प्रदर्शन न होने पाये इसके लिये आयोजकों से संपर्क कर उन्हे हिदायत दे दी जावे। डीआईजी ने कहा कि पुलिस के अधिकारी व कर्मचारियों को अपना आचरण व टर्नआउट अच्छा रखना चाहिए जिससे आम जनता के बीच पुलिस की अच्छी छबि बन सके। बैठक में आईजी अंशुमन यादव ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों से कहा कि थाने में आने वाले पीडि़त की अच्छे से सुनवाई हो और उसके प्रति पुलिस का सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार हो, उन्होने कहा कि यदि पीडि़त की सुनवाई थाना स्तर पर ही हो जाए तो उसको वरिष्ठ अधिकारियों तक आने की आवश्यकता ही नहीे होगी। थाने एक वर्ष से अधिक अवधि के कोई भी प्रकरण थाने में लंबित न रहें। महिला एवं एससीएसटी के प्रकरणों के समयसीमा में निकाल कराने के भी निर्देश दिये गये तथा जघन्य एवं चिन्हित अपराधों में सजा का प्रतिशत बढ़ाने के लिये विवेचना का स्तर उच्चकोटि कर रखने की हिदायत दी।

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