जीवाजी विश्वविद्यालय में एक और घोटाला

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय में पोस्ट बेसिक नर्सिंग व बीएससी नर्सिंग के चार्टों में हेरफेर का मामला अभी निपटा नहीं था कि एक और बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। यहां ऐसी छात्रा की एमएससी कैमिस्ट्री की अंकसूचियां बन गईं जिन्हें 6 माह पूर्व सीएम हेल्पलाइन व सीएम समाधान ऑनलाइन में पहुंचने पर भी बनाए जाने से जेयू अधिकारियों ने मना कर दिया था। अब जबकि इस मामले में संबंधित कॉलेज के प्राचार्य ने ही सारा चिट्ठा उजागर करते हुए जांच में मदद का आश्वासन दे दिया तो जीवाजी विश्वविद्यालय ने भी एक समिति गठित कर दी है पर इस समिति ने अब तक कुछ नहीं किया है।
क्या है पूरा मामला
एमएससी की एक छात्रा का बिना प्रायोगिक परीक्षा के ही परिणाम तैयार करने का मामला जीवाजी विश्वविद्यालय अधिकारियों की पकड़ में 27 अगस्त को आया था लेकिन इसका खुलासा गुरूवार को हो सका है। शासकीय कॉलेज आरोन की छात्रा सपना ग्वाला ने प्रथम सेम की परीक्षा दिसम्बर 2009 में दी थी। इस परीक्षा का परिणाम इस कारण विदहेल्ड हो गया क्यों कि प्रायोगिक परीक्षा के अंक जीवाजी विश्वविद्यालय में नहीं पहुंचे थे। विदहेल्ड परिणाम होने के बाद भी छात्रा को तत्कालीन कॉलेज प्राचार्य ने द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा जून 2010 मे दिलवा दी थी। इस परीक्षा के भी प्रायोगिक परीक्षा के अंक जीवाजी विश्वविद्यालय नहीं आने पर परिणाम रोक दिया गया।
तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा परिणाम जेयू ने घोषित कर दिया पर इस सेमेस्टर में प्रायोगिक परीक्षा के अंक आ गए थे। जून 2011 में हुई चतुर्थ सेम परीक्षा में छात्रा का परिणाम इसलिए अधर में अटक गया क्यों कि पहले के दो सेमेस्टर का परिक्षा के फेर में अटका हुआ था।
ऐसे खुला मामला
शासकीय कॉलेज आरोन गुना के मौजूदा प्राचार्य निरंजन श्रोत्रिय को पिछले दिनों जब पता चला कि छात्रा का परिणाम घोषित हो गया तो उन्होंने चर्चा के दौरान परीक्षा नियंत्रक से कह दिया कि अच्छा रहा इस मामले का निराकरण आपने करवा दिया छात्रा होनहार थी। यह सुन परीक्षा नियंत्रक डॉ. राकेश सिहं कुशवाह के भी कान खड़े हो गए। कारण यह कि मामले का निराकरण उनकी जानकारी में था ही नहीं।
पड़ताल में यह निकला
प्राथमिक रूप से की गई पड़ताल में उजागर हुआ कि छात्रा के किसी परिजन प्राचार्य निरंजन श्रोत्रिय के हस्ताक्षर वाले पत्र के साथ प्रायोगिक परीक्षा के अंक भेजे थे। इन अंकों को जेयू के कर्मचारियों ने चार्ट में चढ़ा भी दिया। जांच समिति प्रमुख प्रो. एके श्रीवास्तव, नलिनी श्रीवास्तव, आरके तिवारी व परीक्षा नियंत्रक राकेश सिंह कुशवाह ने इस तथ्यों को जांच भी लिया लेकिन इस बात का खुलासा नहीं हो सका कि ये एंट्री किस कर्मचारी ने की किस अधिकारी के निर्देश पर हुई।
अंक भेजे ही नहीं
कॉलेज से छात्रा के अंक भेजे ही नहीं गए हैं। यदि वहां प्राचार्य के नाम से अंकों को लेकर कोई पत्र गया है तो वह फर्जी है। इस मामाले में जेयू के अधिकारियों को पूरी बात बता चुका हूं। मेरे हस्ताक्षरों की जांच भी कराई जा सकती है।
निरंजन श्रोत्रिय, प्राचार्य शासकीय कॉलेज आरोन
मामला अभी जांच में हैं

इस मामले में जांच चल रही है। जांच के बाद ही कुछ कहा जाना उचित होगा।
डॉ. राकेश सिंह कुशवाह, परीक्षा नियंत्रक जीविवि

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