साहब तो (शिवराज वर्मा) मेरे लिये भगवान है जिनकी वजह से मुझे नौकरी मिली-शंकुतला माहौर

ग्वालियर. आंखों छलक रहें आंसू रंज और गम नहीं थे बल्कि खुंशी के आंसू आंखों में लिये होंठों पर शब्द आपतो मेरे लिये भगवान की तरह से हैं मैं आपके द्वारा किये गये उपकार अभिभूत हूं नही तो पिछले 4 वर्षो मेरे ससुराल वालों की ठोकरें खाकर बेघर होकर सड़कों पर 5-5 रूपये की रोटी खाकर अपनी छोटी बहन के घर में शरण लिये हुए थी मेरे पति की मौत के बाद मेरे चारों देवरों और सांस ने घर निकाल ने के पूर्व सारी बसयित पर मेरे पति से हस्ताक्षर करा लिये और साथ ही अनुकंपा मुझे ही मिले यह भी लिखवा लिया गया था यह दुःख भरी दस्तां सुन रहे थे हम मप्र के एडिश्नल एक्साइज कमिश्नर शिवराज वर्मा के कक्ष में जिनके प्रयासों महज 11 दिनों में मिली अनुकंपा नियुक्ति मिलने के बाद शंकुतला माहौर अपनी नौकरी ज्वाइन करने के बाद एडिश्नल एक्साइज कमिश्नर शिवराज वर्मा के समक्ष आभार व्यक्त करने पहुंची थी।
क्या है पूरा मामला
शंकुतला माहौर के पति आबकारी विभाग में कार्यरत थे आज से लगभग 4 पूर्व मौत हो गयी थी तभी इनके देवर ने साजिश के तहत शंकुतला के पति से मौत से पहले पूरी बसयित और अनुकंपा नियुक्ति लाभ मुझे ही मिले इस तरह की भाषा लिखकर स्टाम्प पर हस्ताक्षर करा कर शंकुतला माहौर को एक जोड़ी कपड़ों में धक्का मार कर घर से निकाल दिया था तभी वह दर की दर ठोकर खाने के बाद झांसी अपनी छोटी बहन के पास पहुंची और 5-5 रूपये की रोटी खाकर अपना समय गुजार रही थी तभी मप्र के मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के लिये आदेश अनुकंपा नियुक्तियां प्राथमिकता के आधार निपटाई जायें, बस फिर क्या था एडिश्नल एक्साइज कमिश्नर शिवराज वर्मा ने अनुकंपा नियुक्तियों संबंधित फाइलों को मॉनीटरिंग करना शुरू कर दिया मॉनीटरिंग के दौरान एक फाइल पिछले 4 वर्षो से लंबित थी श्री वर्मा की जी नजर इसी फाइल पर रूक गयी और इसी के बाद शंकुतला माहौर को ढूंढना शुरू किया गया तो मालूम चला कि वह झांसी में भिखारी की तरह अपना जीवन यापन रही है तभी एडिश्नल एक्साइज कमिश्नर शिवराज वर्मा ने फोन कर बुलवाया और बीच मप्र उच्च न्यायालय में चल रहे केस से संबंधित वकील बुलाकर शंकुतला माहौर वकील को एक साथ बिठाया गया तो पता चला शंकुतला ने अनुकंपा नियुक्ति के लिये आवेदन ही नहीं दिया तो समय पर अनुकंपा आवेदन (प्रारूप) भरवाकर कार्यवाही शुरू की गयी । तभी आनन फानन में नियमानुसार कार्यवाही करते हुए महज 11 दिनों शंकुतला माहौर को शिवराज वर्मा की दृढ इच्छा से अनुकंपा नियुक्ति मिल गयी।

4 वर्ष से लम्बित का 11 दिन में निराकरण कर अनुकंपा नियुक्ति दी गई
आबकारी आयुक्त कार्यालय मप्र ग्वालियर में कार्यरत भ्रत्य राजेंद्र माहौर की दिनांक 8 अप्रेल 15 को आकस्मिक निधन हो जाने के उपरांत उनकी पत्नी शकुंतला माहौर को उनके ससुरालजनों से परेशान होकर अपनी बहिन के पास रहने लगी । उनके देवर द्वारा पति की सम्पत्ति के साथ अनुकंपा नियुक्ति की भी बसीयत कराकर जूडिशल प्रकरण लगा रखा। उसके देवर द्वारा अनुकंपा नियुक्तियाँ सम्बंधी प्रकरण भी माननीय उच्च न्यायालय से वर्ष 2017 में ही वापस ले लिया था। अपर आबकारी आयुक्त शिवराज सिंह वर्मा द्वारा अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों की समीक्षा करने पर पाया गया की शकुंतला का प्रकरण अनुकंपा नियुक्ति के लिए पूर्णतः फ़िट थाए परंतु किसी के द्वारा कोई ठोस पहल नहीं करने से शकुंतला दर दर की ठोकर खाकर परेशान थी । अपर आबकारी आयुक्त शिवराज सिंह वर्मा द्वारा शकुंतला माहौर व उसके अभिभाषक को अपने समक्ष बुलाकर शकुंतला माहौर से अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन पूर्ण कर समस्त औपचारिकताएँ पूर्ण कराई जाकर दिनांक 8 फरवरी 15 को शकुंतला माहौर को आबकारी आयुक्त रजनीश श्रीवास्तव से आयुक्त कार्यालय में भ्रत्य के पद पर नियुक्ति सम्बंधी आदेश जारी कराया जाकर कार्यालय में उपस्थित कराया गया। इस प्रकार लगभग 4 वर्ष से लम्बित अनुकंपा नियुक्ति मामले का त्वरित निराकरण करते हुए शासन की मनसा के अनुसार त्वरित कार्यवाही की गई। शकुंतला माहौर नौकरी पाकर अत्यंत भावुक हो गई।

– शिवराज सिंह वर्मा अपर आबकारी आयुक्त, ग्वालियर 

पति की मौत दर-ब-दर की ठोकरें खा रही शुंकतला की जिन्दगी 11 दिनों में बदली
मंगलवार की दोपहर नौकरी ज्वॉइन करने के बाद आंखों में आंसू लिये होठों पर शुकून भरे शब्द लेकर दोनों जोड़कर खडी थी और कह रही थी यह तो मेरे लिये भगवान की तरह से हैं नहीं तो मैंने नौकरी आस छोड कर अपनी छोटी बहन के पास एक भिखारी की तरह जीवन यापन कर रही साहब की कृपा मेरी जिन्दगी बदल गयी और बिना 5 पैसे दिये मुझे नौकरी मिल गयी
शंकुतला माहौर, चपरासी, आबकारी विभाग

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