पंचकर्म की दो दिवसीय कार्यशाला गालव सभागार में

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में शुक्रवार को 2 बजे 2 दिवसीय 18 और 19 जनवरी को राष्ट्रीय संगोष्ठी आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य प्रंबंधंन एवं पंचकर्म पद्धति पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय कार्यशाला के मुख्य अतिथि डॉ. वीएम कटोच होंगे। आयुर्वेद एक प्राचीन ऐसी विद्या है जिस के माध्यम से अनादी काल से जनमानस का स्वास्थ्य रक्षण किया जाता रहा है। यह एक ऐसी तकनीक है जिससे संपूर्ण जीवनभर, गर्भाधान, बालचिकित्सा एवं कठिन से कठिन रोग का भी उपचार किया जा सकता है। रोगोपचार पद्धति व्यक्ति के शरीर अनुरूप होकर इसके विभन्न औषधीयगुण एवं पद्धतियॉ शरीर के टोक्सीन्स को दूर करने में मददगार है। ऐसी ही विधा को पंचकर्म कहते है।
इस संगोष्ठी का मुख्य उद्धेश्य है वर्तमान में एलोपैथी के बढते आयामो के कारण भारत के इस आयुर्वेद एवं पंचकर्मविधा का लोप होता जा रहा है। जिसे प्रचलन में रखने के लिये ऐसे आयोजनो की आवश्यकता पड रही है। इस संगोष्ठी में संपूर्ण भारत से आयुर्वेद के विभिन्न विद्वान अपने अपने विचार राखेगे। उनमें मुख्य है, लोक स्वास्थ्य शोध संस्थान के सचिव, आईसीएमआर से व्हीएम कटोच, अनिल शर्मा एवं उनके सहयोगी, नई दिल्ली एमिल फार्मास्युटिकल्स, डॉ संतोषकुमार भट्ट एवं श्रीमती राजा गोपालन, अखिल भरतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली, डॉ सुजाता राजन, शरीर क्रिया विभाग के डॉ मनोज, तिब्बिया महाविद्यालय नई दिल्ली के डॉ पी हनुमंत कुमार, राष्टीªय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर एवं अन्य।
इस संगोष्ठी में मुख्य चर्चा के निम्न विषय रहेंगे
कठिन रोगों की रोकथाम, उनका उपचार तथा विशेषकर मस्तिष्क एवं तंत्र्ािका रोग के लिए रहेगा।
अनियंत्र्ाित रोगों के उपचार में आयुर्वेद की समग्र पद्धति।
हर्बल थैरेपी।
रोगो के निदान एवं उपचार में पंचकर्म की उपयोगिता।
आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता।
आयुर्वेद के प्रचार में उद्योगो की उपादेयता।
वर्तमान में विश्वविद्यालय में पंचकर्म पद्धति से उपचार प्रारंभ किया गया है। जिसका उपयोग मुख्यतः त्वचा रोग, मोटापा कम करना, गठिया, सिरदर्द, पोलियो, लकवा, जोडो का दर्द, अकडन, वातरोग, गर्दन दर्द, माइग्रेन इत्यादि रोगों का निदान हेतु उपचार किया जा रहा है। जब से पंचकर्म सेवा प्रारंभ की गई है तब से अनेक रोगी लाभन्वित हो चुके है। इस कार्यषाला का मुख्य उद्येष पंचकर्म पध्दति का आयुर्वेदिक निजी चिकित्सक तथा विद्यार्थियों को प्रशिक्षणदेकर जनमानस में प्रचार कर उसकी उपयोगिता को समझाना ताकि उसकी उपादेयता सिद्ध हो सके।

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