ग्वालियर व्यापार मेला -रोम रोम पर तुम बरसे हो गई देह कस्तूरी -डॉ सीता सागर

ग्वालियर। मिलके जीवन से उम्र हम तमाम करते हैं, दर्द को भूलने के लिए इंतजाम करते हैं। दिल्ली के जाने.माने हास्यकवि अरुण जैमिनी ने जब अपनी रचना पेश की तो श्रोता उनकी तारीफ किए बिना न रह सके। सर्द हवाओं के झौकों के बीच काव्य रस की धारा बही ग्वालियर व्यापार मेला परिसर स्थित फेसिलिटेशन सेंटर में आयोजित किए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में, जहां श्रोता देर रात तक साहित्य के विभिन्न रसों की रसधार से सराबोर होते रहे।

कार्यक्रम के मुख्यअतिथि मुन्नालाल गोयल सहित मेला प्रधिकरण के अध्यक्ष एवं संभागायुक्त बीएम शर्मा, कलेक्टर भरत यादव, मेला सचिव पीसी वर्मा एवं मेला प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक शर्मा ने मां सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मशहूर हास्य कवि एवं पद्मश्री अशोक चक्रधर की अध्यक्षता में एवं दिल्ली के हास्य कवि डॉ प्रवीण शुक्ला के संचालन में आगरा की कवियित्री ने डॉ रुचि चतुर्वेदी ने माँ वागेश्वरी का स्तवन किया। कवियों ने खचाखच भरे सभागार में अपने काव्य का ऐसा समां बांधा कि सर्द हवाओं के सितम को भूल श्रोता काव्य की गंगा में डूबकी लगाते रहे और अपने चहेते कवियों को सुनने के लिए देर रात तक डटे रहे।

बनारस के हास्य कवि डॉ अनिल चौबे ने हास्य की फुहार छोड़ते हुए कहा कि वादों की खिचड़ी पकी, भाषण पके पुलाव। तब जानों नजदीक है सिर पर कहीं चुनाव।

लखनऊ के सर्वेश अष्ठाना ने कहा कि गरीब मॉं.बाप की बेटियां अपनी गरीबी का प्रायश्चित करती रहती हैं। इसीलिये तो शादी के बाद बहुत जल्द स्टोव से जलकर मरती रहती हैं।
मैं जो हंसता.खिलखिलाता दिख रहा हूं, क्योंकि मैं दहेज लोभी बाप का बेटा हूं।।
दिल्ली के चिराग जैन ने नारी के सम्मान में अपनी कविता पेश करते हुए कहा कि मेरे पिता ने मुझे कभी गुड़िया से नहीं खेलने दिया, ताकि मैं सीख सकूं, कि लड़कियां खेलने की चीज नहीं हैं।
दिल्ली के ही हास्य कवि अरुण जैमिनी ने जिंदगी के दर्द को कुछ इस अंदाज में बयां किया देखिए उनकी बानगी मिलके जीवन से उम्र हम तमाम करते हैं, दर्द को भूलने का इंतजाम करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे दिल्ली के हास्य कवि डॉ प्रवीण शुक्ल ने इन शब्दों में जिदंगी की उलझनों को बयां करते हुए कहा कि
जिंदगी की उलझनों से जूझ के जाना ये मैंने। ना कोई भी जीत अंतिम, ना कोई भी हार अंतिम।।

कार्यक्रम के समन्वयक जौरा (मुरैना) के तेजनारायण शर्मा ने अपने चिरपरिचित अंदाज में काव्यपाठ करते हुए कहा कि
जो किए गये थे उन वादों का क्या हुआ, हुकूमत के नेक इरादों का क्या हुआ।
मजलूम को तो टांग आए शूली पर, मुल्क के रईसजादां का क्या हुआ।।

गाजियाबाद की डॉ सीता सागर ने . रोम.रोम पर तुम बरसे, हो गई देह कस्तूरीए मिली रूह से रूह मिट गई जनम.जनम की दूरीए हुई ऐसी पूरी लगे जग सिंदूरी। सुनाकर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।

अब बारी थी भोपाल के मदन मोहन समर की, जिन्होंने ने कहा कि
ये वक्त बहुत ही नाजुक है, हम पर हमले दर हमले हैं। दुश्मन का दर्द यही तो हम हर हमले पर संभले हैं।।
चित्तोगढ़ राजस्थान के रमेश शर्मा ने गीत नई ऊंचाई देते हुए कहा.
प्रिये गांव मेरे तू चल, तेरे शहर में क्या धरा है ।
वहां बोली में है शहद, यहां बोतलों में भरा है।

जयपुर राजस्थान के जानेमाने व्यंगयकार संपत सरल ने जीवन के अनुभवों को शब्दों के जरिए बयां कर जमकर वाहवाही लूटी।
उन्होंने कुछ इस तरह अपना व्यंग्य प्रस्तुत किया…. डिग्री से अनुभव बड़ा होता है, मैं ऐसे कई को जानता हूं, जिन्होंने एजुकेशन लोन लेकर आईआईटी की थी। फिर उस लोन को चुकाने के लिए उन्हें आईटीआई करनी पड़ी।

रवि अजात शत्रु ने कहा बॉयकट बाल गोरी नागिन सी चाल, चल देख लड़कों को इठलाती है वो लड़की। नैन बीच नैन वो शिखरवार्ता हुइए दांतों बीच अंगुली दबाती है वो लड़की।

आगरा की डॉ रुचि चतुर्वेदी ने बेहतरीन रचना पाठ कर खूब वाहवाही लूटते हुए कहा
मैं बिंदु से रेखा बनाने चली हूं, मैं सागर से नदियां मिलाने चली हूं। निकट आओ तट पर, छुपे क्यों खड़े होए मैं गीतों की गंगा बहाने चली हूं।

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