मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के नाम शोभा ओझा का पत्र

भोपाल. आपके कार्यकाल में 14 बार रक्षाबंधन का त्यौहार निकलने के बाद अच्छा लगा कि ऐन चुनाव के मौके पर ही सही आपको 15 वें रक्षाबंधन पर महसूस तो हुआ कि प्रदेश की महिलाएं भी महत्वपूर्ण हैंए, जिसे आप सरकारी धागे से बांधने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदेश की जनता द्वारा आपको सौंपी गई राशि में से प्रत्येक लिफाफे पर लगभग 5 रूपये का टिकिट एवं छपाई हेतु निकाली गई यही करोड़ों की राशि यदि झोपड़ियों में रहने वालीं बहनों पर खर्च की जाती तो संभवतः उनके जीवन में असली संबल की शुरूआत हो जाती। भले ही आप उन्हें कुछ दे न सके हों, पर आपके पत्र से झांकती अपेक्षा आपकी विवशता और 15 सालों की असफलता दर्शाती है।
सदियों से बहनें रक्षा बंधन के पर्व पर भाइयों से सुरक्षा देने का वादा मांगतीं हैं। यह इतिहास में पहला अवसर है जब आपके जैसा शक्तिशाली भाई अपनी सुरक्षा का वादा बहनों से मांग रहा है। प्रदेश की महिलाओं की एक ही चिंता है कि उनकी बच्चियां जब सड़कों पर निकलें तो आपकी भाषा में नरपिशाचों से बचीं रहें। उनके पति के पास रोजगार हो, उनके बच्चे नशे के आदी न बने और ऊंची पढाई कर अच्छी नौकरी हासिल कर सकें।

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