तानसेन समारोह में सुरबहार पर थिरकी उंगलियां

ग्वालियर. प्रतिष्ठित सुरबहार वादक पं सौरवव्रत की अंगुलियाँ जब सुरबहार वाद्य पर थिरकीं तो ऐसा लगा मानो वातावरण में मीठे मीठे सुरों की फुहार हो रही है । भोपाल से पधारे सौरव व्रत चक्रवर्ती ने अपने वादन के लिए राग ‘‘ललित’’ का चयन किया। यह राग अत्यंत मधुर राग है और इससे अत्यंत खुशनुमा वातावरण निर्मित होता है।
इस राग में सौरवव्रत के सुरबहार वादन में सिलसिलेवार बढ़त कमाल की रही। इसके बाद उन्होंने अलाप जोड़ झाला के साथ पखावज के साथ लयकारी का सुंदर प्रयोग किया। उनके साथ श्री अखिलेश गुंदेचा की पखावज संगत सुनते ही बन रही थी। यह प्रस्तुति चौताल में थी। इसी कड़ी में उन्होंने राग ष्गूजरी तोड़ीष् द्रुत लय सूल ताल में वादन किया। आज की प्रातःकालीन सभा में पं चक्रवर्ती की दूसरे कलाकार के रूप में प्रस्तुति हुई।

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