किसानों के 2 लाख का ऋण माफ, कन्या विवाह निकाह की 28 हजार से बढ़ाकर 51 रूपये होंगे आदेश जारी-कमलनाथ 

भोपाल सीएम कमलनाथ ने आज शपथ ग्रहण के तत्काल बाद कृषि ऋण माफी, रोजगार सृजन की संभावनाओं और कन्या विवाह और निकाह योजना की राशि बढ़ाने संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लिये। कृषि ऋण माफी के संबंध में किसान.कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा आज ही प्रदेश में स्थित राष्ट्रीयकृत तथा सहकारी बैंकों में अल्पकालीन फसल ऋण के रूप में राज्य शासन द्वारा पात्रता अनुसार पात्र पाये गये किसानों के रूण् 2 लाख की सीमा तक का 31 मार्च 2018 की स्थिति में बकाया फसल ऋण माफ करने का आदेश जारी कर दिया गया। राज्य शासन के इस निर्णय से लगभग 34 लाख किसान लाभान्वित होंगे और फसल ऋण माफी पर संभावित व्यय 35 से 38 हजार करोड़ अनुमानित है।
कृषि ऋण माफी के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति

सीएम कमलनाथ ने कृषि ऋण माफी की योजना को तत्काल लागू करने के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति भी बनायी है। यह समिति कृषि ऋण माफी योजना को तत्काल क्रियान्वित करेगी। कमलनाथ ने कहा कि कृषि ऋण माफी हमारा महत्वपूर्ण चुनावी वचन था, जिसे हम जल्दी ही पूरा करेंगे।
4 टेक्सटाइल- गारमेन्ट पार्क स्थापित होंगे
सीएम कमलनाथ ने टेक्सटाइल्सध् गारमेन्ट इण्डस्ट्री में रोजगार सृजन की अधिक संभावनाओं को देखते हुए राज्य के 4 संभागों में टेक्सटाइलध् गारमेन्ट पार्क की स्थापना का निर्णय लिया है। यह पार्क इन्दौर संभाग के धार जिले के मोहना औद्योगिक क्षेत्र, भोपाल संभाग के भोपाल जिले के अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र, जबलपुर संभाग के छिन्दवाड़ा में लेहगडुआ औद्योगिक क्षेत्र और उज्जैन संभाग के रतलाम जिले के जावरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित किये जायेंगे।
70 % रोजगार स्थानीय लोगों को देना अनिवार्य
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोज़गार सुलभ करवाने के उद्देश्य से उद्योग संवर्धन नीति 2018 और एमएसएमई विकास नीति.2017 में संशोधन का निर्णय लिया है। संशोधन के अनुरूप अब राज्य शासन से वित्तीय एवं अन्य सुविधाएँ लेने वाली औद्योगिक इकाइयों को 70 प्रतिशत रोज़गार मध्यप्रदेश के स्थायी निवासियों को देना अनिवार्य होगा।
विवाह.निकाह योजना की 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कन्या विवाह और निकाह योजना में संशोधन कर कन्या की खुशहाली के लिये अनुदान राशि 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार करने का निर्णय लिया। साथ ही अब सभी आदिवासी अंचलों में जनजातियों में प्रचलित विवाह प्रथा से होने वाले एकल और सामूहिक विवाह में भी कन्या को सहायता दी जायेगी।

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