विजय दिवस के दिन सैनिकों के अस्त्र शस्त्र की प्रदर्शनी में बच्चों ने ली जानकारी

ग्वालियर. 1971 के भारत और पाकिस्तान के जाबाजों को याद करने के लिए हर साल 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाया जाता है। इसके उपलक्ष्य में जीवाजी विश्वविद्यालय के मैदान में 3 सेनाओं के अस्त्र शस्त्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इस प्रदर्शनी को देखने के लिए कई स्कूल के बच्चे पहुंचे।
सिक्योरिटी रीजन के चलते सिर्फ उनके मॉडल लाए गए
एयरफोर्स के विंग कमांडेंट योगेंद्र चाहर के रीयल हथियारों की जगह सिक्योरिटी रीजन के चलते सिर्फ उनके मॉडल लाए गए है। जिसमें जमीन से जमीन पर वार करने वाली मिसाइलें, जहाज कंट्रोल करने वाले राडार, मिराज आदि शामिल हैं। इस दौरान वहां टीवी स्क्रीन भी लगाई गई है जिसमें एयरफोर्स के बारे में जानकारी दी जा रही है।
पूर्व चीफ जस्टिस आरसी लाहौटी मुख्यअतिथि के रूप में मौजूद रहें
शाम को 4 बजे विजय दिवस समारोह आयोजित किया गया इसमें भारत के पूर्व चीफ जस्टिस आरसी लाहौटी मुख्यअतिथि के रूप् में मौजूद रहें।
प्रदर्शनी में सजे अस्त्र-शस्त्र
फ्लाईट लेबल रडार, आकाश एयरफोर्स लाउंचर (25 किमी रेंज) रडार सेंसर व्हीकल, कॉम्बैट व्हीकल, रडार सेंसर एलीमेंट्स, मिराज (मॉडल), फायर सिस्टम
आर्मी में जानिये
क्यू एफ 40एमएमएल 70 गन (बोफोर्स) दुश्मन एयरक्राफ्ट को हवा में मार गिराने में सक्षम हैं, फायर कन्ट्रोल रडार- दुश्मन के एयरक्राफ्ट को 20 किमी के दायरे में हवा में मार गिराने में सक्षम हैं। रिर्पोटर रडार- यह रडार 40 किमी के दायरे में दुश्मन के एयरक्राफ्ट सर्च करने में सक्षम हैं, आसपास लगे तोपयुक्त रडार को रिर्पोट करता हैं जिससे उसके पास गुजरने वाले एयरक्राफ्ट मार गिराता है। मीडियम मशीनगन, ऑटोमेटिक ग्रनेड लाउंचर आदि सशस्त्र प्रदर्शित किये जायेंगे।

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