जीते कोई भी पर एमएलबी भवन को हो रहा भारी नुकसान

ग्वालियर. विधानसभा चुनावों में जीत हार किसी की भी हो लेकिन इस बार के चुनाव में यहां ऊपरी मंजिल पर बेशकीमती पत्थर के खंभों को छेदकर ईवीएम की सुरक्षा के लिए लोहे की जालियां लगा दी गई है। भवन के ऐतिहासिक महत्व को ताक पर रखकर और भी कई बदलाव किए गए हैं इन बदलावों की जानकारी कॉलेज शिक्षकों को इसलिए नहीं है क्योंकि ईवीएम रखी होने के कारण वहां केवल जिला प्रशासन के अधिकारी ही आ जा सकते हैं। चुनाव के बाद पता चलेगा कि भवन को चुनाव ने कितने जख्म दिए हैं? ये भवन जिंदगी के कितने दिन और हार गया? एमएलबी कॉलेज भवन का अधिग्रहण पहले भी चुनाव कार्य के लिए होता रहा है।

जालियों से भारी नुकसान
ईवीएम सुरक्षित रखने जिला प्रशासन ने कक्षाओं को स्ट्रांग रूम में बदलने कितना फेरबदल किया है? इसका खुलासा तो चुनाव के बाद तभी हो सकेगा जब यहां से ईवीएम मशीनें हट जाएंगी। बहरहाल दूसरी मंजिल पर लगाई गई जालियां सभी को नजर आ रही है। इन जालियों को इस गरज के साथ लगाया गया है कि कहीं कोई दूसरी मंजिल से ईवीएम मशीन नीचे न फेंक दें। ईवीएम की सुरक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन का यह निर्णय गलत नहीं ठहराया जा सकता है पर जालियां जिन पत्थर के खंबों को छेदकर लगाई गई है उनकी भरपाई भी संभव नहीं है।

अधिसूचना या केन्द्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन होता तो भवन में कील तक नहीं ठोकी जा सकती
ऐतिहासिक महत्व का यह कॉलेज भवन यदि महज एक कागजी अधिसूचना से राज्य या केन्द्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन हो जाता तो भवन में एक कील तक नहीं ठोकी जा सकती थी साथ ही प्रवेश तक पर कई तरह के नियम लग जाते।
पूर्व प्राचार्य आरएस पंवार ने कहा, कॉलेज भवन का उपयोग हो पर मनमानी नहीं
कॉलेज भवन को संरक्षित रखने के लिए लंबे समय तक प्रयास करते रहने वाले पूर्व प्राचार्य आरएस पंवार का कहना है कि कॉलेज भवन का उपयोग हो पर मनमानी नहीं। यह भवन ग्वालियर के वैभवशाली शैक्षणिक इतिहास का नमूना है इसलिए इसका अपयेग वैसा हो जैसा कि राज्य पुरातत्व विभाग के अनुसार उचित हो। अन्य कामों के लिए मनचाहा उपयोग होने से कॉलेज भवन और क्षतिग्रस्त ही होगा।

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