ईद-उल-जुहा- नमाज अता करते ही गले मिलकर दी एक दूसरे को बधाई

ग्वालियर. शहर के बीचों बीच ईद-उल-जुहा पर मोती मस्जिद में मुस्लिमों ने ईद की नमाज अता की है। शहर काजी अब्दुल हामिद के अनुसार नमाज का वक्त तय किया गया उसी के मुताबिक बच्चों के पहुंचे हजारों की संख्या नमाज अता की है। नमाज अता करते हुए मुस्लिमों ने देश के लिये अमन चैन की दुआ मांगी । नमाज पूरी होते ही मुस्लिमों ने एक दूसरे को गले मिलकर ईद की शुभकामनायें। इस मौके पर केरल के बाढ़ पीडि़तों के लिये माकपा की ओर से धनसंग्रह भी किया । वर्षा की संभावनाओं को देखते हुए पूरे परिसर में टेंट लगाया है। फूलबाग चौराहा पर गुरूवारा की ओर जाने वाले यातायात को रोकर मार्ग नमाजियों की वाहनों को पार्क करने की व्यवस्था की गयी।
व्यक्ति अपनी बुरी आदतों की कुर्बानी दे-मुफ्ती मोहम्मद जफर नूरी
मुफ्ती मोहम्मद जफर नूरी ने बताया कि है कि अल्लाहताला ने कुरान शरीफ में फरमाया है कि न तो तुम्हारी कुर्बानी का गोश्त और न उसका खून उन तक पहुंचता है। तुम्हारे दिल की नेकनियती ही अल्लाहताला तक पहुंचती है। कुर्बानी शब्द अरबी भाषा के कुर्ब शब्द से बना है। कुर्ब का अर्थ होता है करीब होना। अगर कोई व्यक्ति कुर्बानी देने के बाद भी अल्लाहताला से दूर है तो कहीं न कहीं उसकी कुर्बानी में कमी है। ईद पर कुर्बानी देनी है तो अपनी कमियों और बुराइयों की दो। जो व्यक्ति अपनी बुरी आदतों की कुर्बानी दे देता है वह अल्लाहताला के करीब हो जाता है। जब व्यक्ति जानवर की कुर्बानी देता है तो उसे सिर्फ जानवर की कुर्बानी नहीं बल्कि अपने अंदर छिपे हैवान रूपी जानवर की भी कुर्बानी देनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति पाक साफ हो जाता है। पाक साफ व्यक्ति अल्लाह का नेक बंदा है। कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से करें। पहले अपने घर के लिएए दूसरा दोस्त और रिश्तेदारों के लिए और तीसरा गरीबों में बांटें।

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