ग्वालियर में भाजपा और कांग्रेस के नाराज नेताओं को बहुजन का दामन थामा

ग्वालियर. कई सीटों पर प्रत्याशी ही घोषित नहीं हुए लेकिन अब तक जो घटनाक्रम हुए हैं उनमें सबसे अधिक बहुजन समाज पार्टी ने चौंकाया है। बसपा ने भाजपा और कांग्रेस के नाराज नेताओं को दोनों हाथों से टिकट बांट डाले हैं। इसका असर यह हुआ कि जिन सीटों पर हाथी सुस्त पड़ा रहता था वहां हाथी की चिंघाड़ से भाजपा और कांग्रेस के गणित बिगड़ रहे हैं। चंबल ग्वालियर संभाग में कई सीटें ऐसी है जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला होत है लेकिन कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने हाथी की सवारी करके कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। उदाहरण ऐसे समझिए कि विजयपुर विधानसभा को कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत का गढ़ माना जाता है। विजयपुर में हमेशा से भाजपा और कांग्रेस के बीच ही टक्कर रही है। पिछले कई चुनाव से बसपा की जमानत जब्त हो रही है लेकिन इस बार विजयपुर से 2 बार विधायक व राज्यमंत्री का दर्जा रहे बाबूलाल मेवरा ने भाजपा से बगावत कर हाथी की सवारी कर ली है।
कहां कहां हाथी ने गड़बड़ाया फूल और पंजे का हिसाब
श्योपुर विधानसभा से बसपा ने इस बार कांग्रेस के सीनियर लीडर तुलसीनारायण मीणा को टिकट दिया है। पिछले चुनाव में यहां त्रिकोणीय संघर्ष था इस बार भी हाथी मजबूती से मैदान में डंट गया है क्योंकि श्योपुर में मीणा समाज के वोट सबसे ज्यादा हैं।
साहब सिंह गुर्जर बसपा में शामिल
ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता साहबसिंह गुर्जर ने टिकट न मिलने पर पार्टी से बगावत कर बसपा में शामिल हो गए है। ग्वालियर ग्रामीण में गुर्जर समाज के वोटों का दबदबा है ऐसे में साहबसिंह गुर्जर के बसपा में आते ही हाथी की चाल बढ़ गई जिसने भाजपा से ज्यादा कांग्रेस के समीकरणों को गड़बड़ा दिया है।
भाजपा से 4 बार भिंड के सांसद रहे रामलखन सिंह कुशवाह के बेटे संजीव सिंह कुशवाह जो खुद जिपं अध्यक्ष रहे है वह पिछले चुनाव में बसपा से टिकट लेकर चुनाव लड़े। इस बार भी बसपा के प्रत्याशी बनकर कांग्रेस व भाजपा का गणित बिगाड़ रहे हैं।
कई सीटों पर बसपा ने नहीं खोले पत्ते
ग्वालियर चंबल संभाग में कुल 34 विधानसभा सीट हैं जिनमें से अधिकांश पर बहुजन समाज पार्टी ने अपने प्रत्याशी तय कर दिए हैं करीब 10 विधानसभा ऐसी रह गई हैं जहां बसपा ने अब तक पत्ते नहीं खोले इस कारण भाजपा व कांग्रेस में हड़कंप सा मचा है।

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