संगीत विश्वविद्यालय-वित्त नियंत्रक पर मेहबानी क्यों?

ग्वालियर. फर्जी बिलों के भुगतान सहित तमाम वित्तीय गड़बडि़यों में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा को तो बर्खास्त कर दिया गया पर उनके साथ इन तमाम गुल गपाड़े में शामिल रहे विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक एवं प्रभारी कुलसचिव अजय शर्मा के विरुद्ध किसी भी तरह का कार्यवाही न होने से लोग हतप्रभ है। सूत्रों ने बताया है कि वित्त नियंत्रक ने कुलपति के तमाम फर्जी बिल पास किए और उनका भुगतान कराया जबकि वित्त नियंत्रक के नाते ऐसे बिलों का भुगतान नहीं होने देना चाहिए था। इसके लिए उन्हें कुलपति की तरफ से पारितोषिक भी मिला। 30 हजार रुपए माह किराए पर उन्हें गाड़ी उपलब्ध कराई गई जिसका उपयोग वह आज भी कर रहे है।
सूत्रों ने बताया है कि प्रो. लवली शर्मा से मिलीभगत के चलते वित्तनियंत्रक अजय शर्मा ने ऐसे पुराने बिल तमाम पास कर दिए जिन्हें उनके पूर्ववर्ती वित्त नियंत्रक हेमंत जोशी ने पास करने से मना कर दिया था। इनमें से तमाम बिल फर्जी बताए गए हैं। पूर्ववर्ती वित्त नियंत्रक ने इन बिलों पर टीम भी अंकित की थी।
बहरहाल अजय शर्मा ने बिल पास करने में तमाम गड़बडि़यों कीं। 25 अगस्त 2017 को प्रो. लवली शर्मा को तत्कालीन राज्यपाल से भेंट करने अहमदाबाद गईं। उन्होंने गांधी नगर गुजरात से 800 रुपए की 2 किलो मिठाई गई। वृन्दावन स्वीट्स एण्ड स्नेक्स से खरीदी गई इस मिठाई का कैश मेमो विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के नाम पर है भुगतान कुलपति को हुआ। मिठाई खरीदी के और भी मामले हैं। सूत्रों ने बताया है कि प्रो. लवली शर्मा ने यह मिठाई राज्यपालों को भेंट की थी। खास बात ये है कि इसे सरकार खर्च से जोड़कर भुगतान किया गया लेकिन जानकारों का मानना है कि सत्कार बजट से किसी को उपहार तभी दिया जा सकता है जब वह आपके यहां आया हो या आपका मेहमान हो पर सब कुछ जानते हुए भी बिल पास किए गए और उनका भुगतान हुआ। शर्मा ने ऐसे कई लोगों भुगतान बिना पड़ताल के लिए जो प्रो. लवली शर्मा के चहीते रहे। जबकि कई पुराने बिलों का भुगतान आज भी लंबित है।
सूत्रों ने बताया है कि तमाम फर्जीवाड़ा करने के बावजूद प्रो. लवली शर्मा की कृपा से वित्त नियंत्रक के लिए 30 हजार रुपए महीना किराए पर गाड़ी लगवाई गई। आज भी वह इस गाड़ी का उपयोग कर रहे हैं। जबकि उस वक्त विश्वविद्यालय के पास पहले से अतिरिक्त गाड़ी थी। कुलपति ने तो 4 लाख की गाड़ी 60 हजार में अपने ही चालक को दिलवा दी।
राजभवन को फिर शिकायत जांच की मांग
विश्वविद्यालय के हित में एक बार फिर छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने राज्यपाल को तथ्यात्मक शिकायतें भेजी हैं। इन शिकायतों में वित्त नियंत्रक के कारनामों व उनके पूरे कार्यकाल की जांच की मांग की गई है।

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