प्रदेश की मंडियो में किसान भोजन योजना में करोड़ों का फर्जीवाड़ा लगभग 1000 करोड़ डकार गए?

प्रदेश के मंडियो में सत्ताधारी दल के संरक्षण में करोड़ों रूपये का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। चुनाव के पहले तो इसकी रफ्तार और तेज हो गई है। अचम्भे की बात तो यह है कि मंडी में किसानों की भोजन योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। कई मंडी पदाधिकारियों की जांच लोकायुक्त में चल रही है। शिवराज सरकार में भ्रष्टाचार एक व्यवस्था बन गई है
प्रदेश की मंडियों में मुख्यमंत्री किसान भोजन योजना में करोड़ों का फर्जीवाड़ा हो रहा है जब सरकार की शह पर किसानों के भोजन पर ही डाका डाला जा रहा है तो ऐसी सरकार से किसानों के हित में और क्या उम्मीद की जा सकती है, प्रदेश में छोटी बड़ी लगभग 500 मंडिया है। यहां किसानों को नाम मात्र के शुल्क पर ठेकेदारो के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराने का प्रावधान है । इसके लिए मंडियों द्वारा बकायदा कूपन मुद्रित करा कर किसानों को दिए जाते हैं ताकि वे अनाज बेचने में समय लगने के दौरान भर पेट भोजन कर सके ।
लेकिन इस योजना के मूल उद्देश्य को भूल कर मंडी अधिकारी और कर्मचारी एक सगंठित गिरोह बनाकर भोजन उपलब्ध कराने वाले ठेकेदार की मिलीभगत से करोड़ों रूपयों का फर्जीवाडा कई वर्षों से कर रहे हैं। यदि इसकी जांच की जाए तो लगभग 1 हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि यह सब मिलकर डकार गए। हर मंडी से हजारों कूपन किसानों को न देकर गायब कर दिए गए और केवल बिल के आधार पर ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया । उदाहरण के लिए राजधानी से सटी नरसिंहगढ़ मंडी के दस्तावेज आपको दिखाए जा रहे है।

इसका एक उदाहरण भोपाल से सटे नरसिंहगढ़ की मंडी का है। राजगढ़ कलेक्टर की जांच में आर्थिक अनियमितताओं के दोषी, मंडी अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर कराने और वसूली के आदेश जारी हुए हैं। उन्हें रिश्वतखोरी के अगले चरण के तहत 26 माह बाद भी मंडी बोर्ड भोपाल के अधिकारियों ने अभयदान दिया हुआ है। इसके सबूत भी आपको दिखाए जा रहे हैं । मजे की बात तो यह है कि मप्र शासन की आडिट रिपोर्ट में भी भारी भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता, पद के दुरूपयोग मिथ्या साक्ष्य, कूट रचना, रिकार्ड में हेराफेरी, फर्जी लिखावट, फर्जी हस्ताक्षर का स्पष्ट खुलासा है। आडिट दल ने मंडियों में कई लोगों को अनियमितता का दोषी पाया है। इसके प्रमाण भी आपको दिखाए जा रहे हैं। फिर क्या कारण है कि कोई कार्यवाही नहीं की जा रही हैघ् जाहिर है शिवराज सरकार की मिलीभगत से सब हो रहा है।
भूपेन्द्र गुप्ता ने खुलासा किया कि इसी तरह मंडियों की स्थायी निधि राशि में भी करोड़ों का घपला हो रहा है आखिर यह किस की जेब में जा रहा हैघ् मंडी आय का 20 प्रतिशत स्थायी निधि में जमा होना चाहिए जिसमें सालों से अनियमितता चल रही है। अकेले नरसिंहगढ़ मंडी में लगभग 76 लाख रूपये स्थायी निधि राशि में जमा किया जाना शेष है। इसके अलावा मंडियों में निविदाओं का प्रकाशन, मुद्रण कार्य, वाहन मरम्मत, सुरक्षा गार्ड आदि ऐसे कई मद है जिनमें सालों से अनियमितताएं की जा रही हैं। हर भ्रष्टाचार की जांच भ्रष्टाचार के माध्यम से ही या तो समाप्त हो जाती हैए या दबा दी जाती हैए या फिर लंबित रखी जाती है।

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