ऐतिहासिक फैसला-हाईकोर्ट ने एससी, एसटी एक्ट में गिरफ्तार पर लगाई रोक

ग्वालियर. एससी, एसटी एक्ट के तहत दर्ज केस में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं कि प्रकरण की विवेचना जारी रखी जाए लेकिन जरूरी होने पर ही आरोपी की अरेस्ट करें यदि आवश्यक नहीं है तो गिरफ्तारी नहीं की जाए। एडवोकेट मोहित शिवहरे के अनुसार मुरैना के सिहोनियां थाने में दर्ज एक केस को चुनौती देते हुए इंदरसिंह आदि की ओर से याचिका पेश की गई थी। जिसमें हाईकोर्ट से आग्रह किया गया था कि उक्त एफआईआर झूठी दर्ज कराई गई है।
इस मामले में इंदरसिंह, मनीष सिंह व अरविंद सिंह को गिरफ्तार नहीं किया जाए। क्योंकि एससी, एसटी एक्ट में हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन के बाद अग्रिम जमानत का प्रावधान खत्म कर दिया गया है और तत्काल गिरफ्तारी के आदेश जारी हो चुके हैं। जस्टिस आनंद पाठक के समक्ष इस प्रकरण में 10 सितंबर को सुनवाई हुई थी जिसमें शिवहरे ने बताया था कि इस एक्ट के तहत दर्ज केस में किसी भी प्रकार के हथियार या अन्य सामान की जब्ती नहीं होती।
उक्त एक्ट के प्रकरणों में तत्काल गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के गिरफ्तारी संबंधी कुछ निर्णयों का हवाला भी दिया गया। जस्टिस पाठक ने आदेश दिए है कि विवेचना अधिकारी जांच करें, गिरफ्तारी उस वक्त तक न करें जब तक कि गिरफ्तारी आवश्यक नहीं हो।
सिहोनियां निवासी विवेक शखवार ने इंदरसिंह आदि के खिलाफ 2 जुलाई को एससी, एसटी एक्ट व मारपीट आदि की धाराओं के तहत केस दर्ज कराकर बताया था कि तीनों लोगों ने खेत से मिट्टी खोदे जाने को लेकर विवाद किया था। कोर्ट ने पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा था कि आरोपियों के खिलाफ एससी, एसटी एक्ट के साथ अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ है। वह सब 7 साल से कम सजा वाली धाराएं हैं बावजूद इसके गिरफ्तारी के जरूर कारण नहीं बताए गए है।
आदेश न मानने वाले टीआई को कोर्ट का नोटिस
एससी, एसटी एक्ट के तहत केस में आरोपी सुरेश सिंह चौहान व दिनेश सिंह चौहान की गिरफ्तारी में कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने पर महाराजपुरा टीआई वायएस तोमर को एट्रोसिटीज कोर्ट ने कारण बताओं नोटिस दिया है। उक्त नोटिस में कहा गया है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के कारण न बताते हुए व दूसरी प्रक्रिया पूरी किए बिना ही गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट ने आदेश दिए है कि टीआई 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे कोर्ट में उपस्थित होकर नोटिस का जवाब पेश करें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो मान लिया जाएगा कि आपको टीआई अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है और हाईकोर्ट को रेफ्रेंस के संबंध में आदेश पारित किया जाएगा।

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