ग्वालियर में निगमायुक्त ने पार्षदों के मौलिक निधि से स्वीकृत 5 करोड़ के कार्य रोके

ग्वालियर. नगर निगम चुनाव से पूर्व अपने वार्डों में विकास कार्य कराकर जनता में पेठ बनाने की तैयारी कर रहे निवर्तमान पार्षदों को गहरा धक्का लगा है क्योंकि नगर निगम आयुक्त ने पार्षदों की मौलिक निधि से स्वीकृत कार्यों पर रोक लगा दी है। करीब 5 करोड़ के काम रोक दिए गए है इससे पार्षदों की चिंताएं बढ़ गई है। पार्षदों का कहना है कि अगर स्वीकृत कार्य रोके गए तो विरोध किया जाएगा वहीं निगमायुक्त ने साफ कह दिया है कि जिन कार्यों के टेंडर हुए हैं उन्हें ही कराया जाएगा।
नगर निगम परिषद का कार्यकाल 10 जनवरी को समाप्त हो चुका है इससे पहले पार्षदों के कई कार्य मौलिक निधि से स्वीकृत हुए थे लेकिन उनके टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी। ऐसे कार्यों को रोकने के लिए निगमायुक्त ने आदेश जारी किया है। अब इन कार्यों की फाइलें आगे नहीं बढ़ाई जाएंगी। निवर्तमान पार्षदों के अनुसार जो कार्य स्वीकृत हो चुके है वह होने चाहिए।
न्यायिक परामर्श लेंगे
पार्षदों को विकास कार्यों के लिए मौलिक निधि के रूप में एक साल में 47 लाख रु. मिलते है। इसका उपयोग वह स्वयं के वार्ड या शहर में किसी भी जगह पर कर सकते हैं। 9 जनवरी से पहले कई पार्षदों के वार्डों में कार्य स्वीकृत किए गए थे लेकिन इनके टेंडर नहीं हुए थे। वहीं पार्षदों के अनुसार जानबूझकर निगम अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की ऐसे में पार्षद अब न्यायिक परामर्श लेंगे साथ ही इसक विरोध करेंगे।

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