अव्यवस्थित यातायात में कैसे चलेंगी सिटी बसें- आरपी सिंह

ग्वालियर। नगर निगम की कार्यशैली और उसके अधिकारी हमेशा से ही विवादों के घेरे में रहे हैं। भाजपा सरकार के निरन्तर 3 कार्यकाल में नगर निगम 9 दिन चले अढ़ाई कोस वाली कविता को चरितार्थ करता नजर आया। ऐसा ही एक मामला अब सामने आ रहा है। जिसमें शहर के चार मार्गों पर 16 नॉन एसी बसें दौड़ाने की तैयारी चल रही है। जिसका अप्रूवल कराने के लिए गुरूवार को नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह ने डेमो भी लिया।
इस मामले में प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नगर सरकार जनता की गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाने के नए.नए तरीके अपना रही है। इसके तहत ही निगम शहर के कई चौराहों, डिवायडरों, पार्कों और अन्य स्थानों को बार.बार तोड़कर बना रहा है। इसका सीधा सा फण्डा है जितनी बार टेण्डर, उतनी बार कमीशन। नगरीय प्रशासन मंत्री ग्वालियर से हैं और ग्वालियर की सड़कें प्रदेश भर में सबसे ज्यादा बद्तर हालत मे हैं। और अब इन्हीं सड़कों पर सरकार ने 16 सिटी बसें चलाने का प्लान तैयार किया है। भाजपा के दबाव में निगम प्रशासन केवल और केवल इस चुनावी साल में बिना प्लानिंग के अधिक से अधिक विकास कार्य दिखाना चाहती है। जिसकी कोई प्लानिंग नहीं की गई है।
जनता के नगर निगम से सवाल
शहर के अस्तव्यस्त यातायात में यह बसें सुगमता के साथ चल पाएंगी।
अपनी मर्जी के स्टॉप पर रुकने वाले ऑटो.टैम्पो के साथ चलकर ये बसें सही समय पर गंतव्य तक पहुंचा पाएंगी।
क्या अतिक्रमण से हुई संकरी रोडों पर ये सिटी बसें चल पाएंगी।
क्या ये लोअर फ्लोर वाली गड्ढेदार सड़कों में बिना फंसे निकल जाएंगी।
क्या इस सिंगल गेट की बसों में कभी कोई अप्रिय घटना हुई तो सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा।
भारी वाहनों से आए दिन होने वाले हादसों को ध्यान में रखते हुए सिटी बसों का संचालन किया गया है।
जिन हालातों में पूर्व में सिटी बसों का संचालन ठप हुआ था उस पर होमवर्क कर लिया गया।
क्या शहर में सिटी बसों के संचालन में 5.10 वर्ष आगे की प्लानिंग की गई है या पूर्व की भांति ये भी ठप हो जाएंगी।

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