बैंक ऑफ बड़ोदा, देना और विजया बैंक विलय के विरोध में कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

ग्वालियर. यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स, जो कि बैंकिंग उद्योग के शत-प्रतिशत लगभग 10 लाख बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों का प्रतिनिधत्व करता है, के आव्हान पर बैंक आफ बड़ौदा, देना बैंक व विजया बैंक के विलय के घोषणा के विरुद्ध प्रदर्शन एवं सभा की गई।
आज भारत में बैंकों के विस्तार की आवश्यकता हैं न कि बैंकों के एकीकरण व विलय की। इस बात का कोई प्रमाण नहीं हैं कि विलय से बैंक मजबूत होंगे। 5 सहयोगी बैंकों के एसबीआई में विलय से कोई चमत्कार नहीं हुआ, बल्कि इसकी वजह से शाखाएँ बंद हुई, खराब ऋण बढ़े, स्टाफ में कमी हुई, व्यवसाय में कमी हुई तथा 200 वर्षों में एसबीआई पहली बार घाटे में आई है। 2018 में एसबीआई के खराब ऋण बढ़कर रू. 2,25,000 करोड़ हो गए हैं। अतः विलय से खराब ऋणों की वसूली में कोई मदद नहीं मिलती है।
हम सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हैं और माँग करते हैं कि इस निर्णय की पुर्नसमीक्षा व पुर्नविचार किया जाए।
आज 18 सितंबर 2018 को केन्द्र सरकार द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक, विजया बैंक, के आपसी विलय की घोषणा के विरोध में यूएफबीयू ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने का निर्णय लिया है। इसी तारतम्य में आज शाम 5.45 बजे ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स रीजनल आफिस प्रेस काम्पलेक्स होशंगाबाद रोड भोपाल के सामने प्रर्दशन एवं सभा का आयोजन किया गया। समस्त बैंक वाइज अधिकारी/ कर्मचारी संगठनों के साथी इसमें शामिल हुए। सभा को साथी संजीव सबलोक, मो. नज़ीर कुरैशी, मदन जैन, संजय कुदेशिया, एम.जी. शिन्दे, अरूण भगोलीवाल, एम.एस. जयशंकर, सुनील सिंह, विनोद सिंह नेगी, जे.पी. झंवर आदि ने सम्बोधित किया।

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