कैबिनेट का फैसला-ट्रिपल तलाक पर अध्यादेश लाई मोदी सरकार, कांग्रेस ने कहा वोट पॉलिटिक्स

नई दिल्ली. एक बार में ट्रिपल तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) देना अब अपराध हो जायेगा। केन्द्रीय कैबिनेट ने बुधवार को इससे संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इस पर राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे अवैध बता चुका है।
ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर केन्द्र सरकार काफी अक्रामक रही है, इसके लिये केन्द्र सरकार की ओर से बिल भी पेश किया गया था, हालांकि, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के विरोध के बाद भी इस बिल में संशोधन किया गया था, कैबिनेट में बैठक की जानकारी देते हुए केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि हमारे सामने 430 ट्रिपल तलाक के मामले आये हैं, जिनमें से 229 सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूर्व 201 सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद के हैं, हमारे पास ट्रिपल तलाक के मामलों के पुख्ता सबूत भी हैं, इनमें सबसे अधिक मामले (120) उत्तरप्रदेश से हैं।
कानून मंत्री रविशकर प्रसाद ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर आड़े हाथों लिया और उन्होंने कहा कि हमने इसे बार-बार पास करवाने की कोशिश की, लगभग 5 बार कांग्रेस को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन वोटबैंक के चक्कर में कांग्रेस ने इसे पास ही नहीं करने दिया और कांग्रेस इस पर वोटबैंक की राजनीति कर रही है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सोनिया गांधी, ममता बनर्जी और मायावती को इस मुद्दे पर सरकार का साथ देना चाहिये।
कांग्रेस ने केन्द्र सरकार पर किया वार
जैसे ही ट्रिपल तलाक बिल पर अध्यादेश पारित होने की बात सामने आई कांग्रेस की तरफ से प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गयी। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार मुस्लिम महिलाओं को हक दिलवाने के पक्ष में नहीं हैं, हम चाहते हैं कि मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ मिले, भाजपा इस पर राजनीति कर रही हैं।
ट्रिपल तलाक के बिल में क्या खास
ट्रायल से पूर्व पीडि़ता का पक्ष सुनकर मजिस्ट्रेट दे सकता है आरोपी को जमानत।
पीडि़ता, परिजन और खून के रिश्तेदार ही एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।
मजिस्ट्रेट को पति-पत्नी के बीच समझौता कराकर शादी बरकरार रखने का अधिकार होगा।
एक बार में तीन तलाक बिल की पीडि़त महिला मुआवजे की हकदार।

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