राजनेता का बेटा राजनेता इसमें बुराई क्या है-सुमित्रा महाजन

भोपाल. चुनाव आयोग ने अभी एनआरआई नागरिकों को मतदान का अधिकार दिया है, चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिये आवश्यक मतदान का कानून लाना चाहिये। इससे चुनाव खर्च न सिर्फ घटेगा, बल्कि जागरूकता बढ़ने से बदलाव दिखने लगेंगे।
नेता पुत्र और पुत्री काबिल हो तो
नेता पुत्र और पुत्री अगर काबिल है और वह जिताऊ उम्मीदवार है तो पार्टियों को उसे टिकट देना चाहिए। चुनाव समिति भी उम्मीदवार का सिलेक्शन उसकी क्षमताओं के आधार पर करे, न कि नेता पुत्र.पुत्री के लिहाज से। उनसे वन नेशन.वन इलेक्शन, एट्रोसिटी एक्ट और राजनीति में परिवारवाद के बढ़ावे को लेकर सवाल पूछे गए।
लोकसभा की अपेक्षा में विधानसभाओं के सत्रों की संख्या घटी
राज्य विधानसभाओं में सत्रों की संख्या लगातार घट रही है। इंडियन पार्लियामेंट्री यूनियन की बैठक में भी इस मसले पर चर्चा हुई है। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बात की जा रही है। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि हर साल लोकसभा की 100 और राज्य विधानसभा की 60 बैठकें अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
राजनेता का बेटा राजनेता इसमें बुराई क्या है
मैं न तो बेटों को बढ़ा रही हूं और न ही उन्हें पीछे खीचूंगी। राजनेता का बेटा राजनेता बने, इसमें बुराई क्या है। बल्कि चर्चा उनकी योग्यता पर होना चाहिए।
साभार-भास्कर

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