ग्वालियर में दशहरे पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बेटे के साथ की शमी पूजन

ग्वालियर. ग्वालियर में यदि दशहरे की बात की जाए तो कुछ और है क्योंकि यहां सिंधिया राजपरिवार में दशहरे पर कई परंपराएं हैं जिसमें सबसे पुरानी है शमी पूजन की प्रथा जो करीब 200 वर्षो से चली आ रही है। दशहरे पर सिंधिया परिवार शमी वृक्ष पूजा को देखने और पत्तियां लूटने के लिए मंगलवार को हजारों लोग माढरे की माता पर जमा होते हैं।
आठवीं पीढ़ी का नेतृत्व कर रहे ज्योतिरादित्य
सिंधिया परिवार के मुखिया पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने घराने की परंपरा के अनुसार दशहरा पर्व पर माढरे की माता के मंदिर के पास स्थित मैदान में शमी पूजन किया। इस मौके पर उनके बेटे महाआर्यमन भी राजसी पोशाक में साथ थे। सिंधिया परिवार के पुरोहितों ने पूजन कराया। इसके बाद सिंधिया ने शमी के वृक्ष पर तलवार चलाकर उसकी पत्तियां गिराई तो वहां मौजूद सिंधिया परिवार के करीबी सरदारों और उनके वंशजों ने शमी की पत्तियां जिन्हें सोना कहा जाता है उसे सोने के रूप में लूटीं। इससे पहले सिंधिया बेटे महाआर्यमन के साथ गोरखी स्थित देवघर पहुंचे। यहां उन्होंने राजसी चिन्हों का पूजन किया।
सुबह निकली थी सवारी
महल से जुड़े एसके कदम ने बताया कि दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा सदियों पुरानी है उस वक्त महाराजा सुबह 8.30 से 9 बजे अपने लाव-लश्कर व सरदारों के साथ महल से निकले थे फिर सवारी गोरखी पहुंची यहां देव दर्शन बाद यहां शस्त्रों की पूजा की। दोपहर तक यह सिलसिला चलता रहा। महाराज आते वक्त बग्घी पर सवार रहे लौटते समय हाथी के हौदे पर बैैैैैठकर गए। शाम को शमी वृक्ष की पूजा के बाद महाराज गोरखी में देव दर्शन के लिए गए।

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