अगर मैं मुंह खोल दूं तो देश में तूफान आ जायेगा, वैज्ञानिक जिस सम्मान के हकदार उन्हें सम्मान मिलना चाहिये-राजनाथ सिंह

ग्वालियर देश के वैज्ञानिक जिस सम्मान के हकदार हैं उन्हें वह सम्मान मिलना चाहिये लेकिन मिलता नहीं है मैं दिल की गहराईयों से उनका स्वागत करता हूं जो वैज्ञानिक बेहतर कार्य कर रहें हैं उनके लिये और पुरस्कार तय किये जाने चाहिये। मैंने अभी प्रयोगशाला का भ्रमण किया और जो मैंने वहां पर देखा है अगर मैं मुंह खोल दूं तो देश में तूफान खड़ा हो जायेगा। मैं आने से पहले समझ रहा था होगी कोई छोटी मोटी लैब, यहां आकर मेरी सोच ही बदल गयी। प्रौद्योगिकियों के निरीक्षण के उपरांत मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यहां के वैज्ञानिकों का पिछले 45 वर्ष का श्रम इसे महत्त्वपूर्ण ऊंचाईयों पर ले गया है। ग्वालियर संगीत सम्राट तानसेन की भूमि है, जो कि अकबर के दरबार के नव रत्नों में से एक थे, उसी तरह ग्वालियर स्थित यह प्रयोगशाला डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं के मध्य एक नगीने के समान है। उन्होंने यह भी कहा कि जैव.रसायन आतंकवाद की संभावना से कभी इन्कार नहीं किया जा सकता। ग्वालियर डीआरडीओ बायो.डिफेंस नामक एक महत्तवपूर्ण प्रोजेक्ट पर कार्य कर रही है जिसका उद्देश्य देश की सशस्त्र सेनाओं एवं आम आबादी की रक्षा करना है एवं डीआरडीओ ग्वालियर इस दिशा में पूरी तरह सक्षम एवं तैयार है। यह उद्गार झांसी रोड स्थित डीआरडीई लैब के निरीक्षण के उपरांत आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह संबोधित करते हुए कही।

डीआरडीई की 200मीटर से कम होगी
केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि डीआरडीई से 200 मीटर की दूरी का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जा रहा हूं मैं इस संबंध में कहना चाहता हूं समय आने पर इस संबंध में विचार किया जायेगा, जिससे आसपास के भवनों को क्षति नहीं पहुंचे।
आम का पौधरोपण किया

केन्द्रीय रक्षामंत्री ने प्रयोगशाला का निरीक्षण के बाद परिसर में आम पौधा लगाया है। इस मौके पर राजनाथ सिंह कर्मचारियों की पीठ थपथपाई। डीआरडीओ रक्षा अनुसंधान तथा अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. जी सतीश रेड्डी एवं अध्यक्ष डीआरडीई महानिदेशक डॉ. एके सिंह ने भी पौधरोपण किया।

ग्रेनेड का सफल प्रदर्शन

केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के सामने डीआरडीई परिसर में  ग्रनेड का प्रदर्शन किया गया जिसका इस्तेमाल कश्मीर पथराव कर रहे युवकों को तितर बितर करने के लिये किया जाता है उसमें कोई घायल नहीं होता है बल्कि उसमें मिर्ची युक्त धुंआ निकलता हैं। इसका बहुत सफल प्रदर्शन किया गया जिसके लिये रक्षामंत्री ने डीआरडीई के वैज्ञानिकों की सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ राहुल भट्टाचार्या ने किया तथा अंत में डीआरडीई के निदेशक डॉ डीके दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर डीआरडीओ मुख्यालय से पधारे वरिष्ठ अधिकारी डॉ देवकांत पहाड़ सिंह, कर्नल डीके शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ के गणेशन, डॉ विकास ठाकरे, डॉ एके गुप्ता, डॉ डीबी काम्बोज, डॉ एएस बी भास्कर, डॉ एके गोयल, डॉ एसी पांडेय के अलावा ग्वालियर के कलैक्टर अनुराग चौधरी एवं पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन भी मौजूद थे।

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