रफाल फाइटर प्लेन को गोल्डन एरो स्क्वाड्रन के नाम से जाना जायेगा, पहला रफाल 20 सितम्बर को आयेगा

अंबाला. अंबाला एयरबेस में मंगलवार को वायुसेना आईएएफ ने अपनी गोल्डन एरो स्क्वाड्रन को रफाल फाइटर जेट की पहली स्क्वाड्रन के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। अंबाला एयरबेस पर रेजरेक्शन सेरेमनी में वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा ने ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह को एक मेमोंटो भेंट दिया। वायुसेना की 17 नंबर स्क्वाड्रन यानी गोल्डेन एरो को देश में रफाल की पहली स्क्वाड्रन होने का गौरव मिलेगा।
8 अक्टूबर को वायुसेना दिवस और दशहरा भी
संभावना है कि अक्टूबर में वायुसेना को रफाल की पहली खेप फ्रांस में मिलेगी। चर्चा है कि ये समारोह 8 अक्टूबर को होगा जोकि वायुसेना दिवस भी है और दशहरा भी। वायुसेना को कुल 36 रफाल फाइटर एयरक्राफ्ट मिलेंगे जिनसे दो स्क्वाड्रन बनाई जाएंगी। पहली स्क्वाड्रन अंबाला में और दूसरी को पूर्व में हाशीमारा एयरबेस पर तैनात करने की संभावना है।
गोल्डेन एरो ने 1965-1971 के युद्धों में आने जौहर दिखाए
गोल्डेन एरो स्क्वाड्रन को 1951 में अंबाला में ही तैयार किया गया था उस समय इसे हार्वर्ड एयरक्राफ्ट से लैस किया गया था बाद में इसे वैंपायर और हंटर एयरक्राफ्ट दिए गए। 1975 में इसे उस समय के सबसे आधुनिक मिग-21 एयरक्राफ्ट दिए गए जो अब तक इस स्क्वाड्रन की शान रहे। गोल्डेन एरो ने 1965 और 1971 के युद्धों में आने जौहर दिखाए थे। 1999 में कारगिल के युद्ध के दौरान ये स्क्वाड्रन भटिंडा में तैनात थी। वायुसेना ने कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन सफेद सागर लांच कर दिया।

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