परिषद पर लगी हैं पाबंदी जनता के मुद्दों पर

ग्वालियर नगर सरकार की हैसियत पर पिछले 10 दिनों से छाया कुहासा अब तक बरकरार है। राजनैतिक ग्रहण के हालातों में नगरनिगम परिषद की तस्वीर साफ नहीं होने से न तो आम जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर गौर किया जा रहा है और न ही स्थानीय स्तर पर होने वाले विभिन्न विकास कार्यो को लेकर पार्षदों की ही कोई सुनवाई हो पा रही है। इस तरह के माहौल में निगम अधिकारियों के लापरवाह रवैये के चलते शहर के हालात और बदतर होने का खतरा गहराता जा रहा है।
बिना महापौर और मेयर इन काउंसिल की मौजूदा निगम परिषद में इन दिनों सत्तापक्ष और विपक्ष भूमिका तक साफ नहीं है। गौरतलब है कि सांसद निर्वाचित होने के बाद विगत 5 जून को विवेक शेजवलकर ने महापौर के पद इस्तीफा दे दिया था। ऐसी स्थिति में उनके द्वारा बनाई गयी एमआईसी का वजूद भी स्वतः समाप्त हुआ माना जायेगा।
उधर राज्य शासन की ओर से शहर के महापौर को लेकर स्थिति अब तक साफ नहीं होने से नगर सरकार का स्वरूप तय नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति में बिना महापौर एवं एमआईसी के अधर में अटकी परिषद में विपक्ष की भूमिका भी तय होने से रही। लिहाजा न तो परिषद की बैठक हो पा रही और न शहर सरोकार के मुद्दों पर कोई चर्चा। ऐसे में जनता के मुद्दों पर फैसले का तो कोई सवाल ही नहीं उठता।
पानी को लेकर हाहाकार
लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण शहर की लगभग तिहाई आबादी लम्बे समय से जल संकट झेल रही है। इनमें सर्वाधिक उपनगर ग्वालियर में घासमंडी, गुदडी मोहल्ला, सेवानगर की जनता परेशान है। ग्वालियर पूर्व में समूचा सिटी सेंटर इलाका सिंधिया नगर से ग्वालियर दक्षिण में गुढागुडी का नाका, आमखो पहाडी, अवाडपुरा आदि ऐसे इलाके हैं। जहां पिछले एक माह से भीतर जल संकट से त्रस्त जनता सडकों पर उतर चुकी हैं।
गंदगी का अंबार

नगर निगम की लापरवाही के चलते शहर भर के छोटे बड़े लगभग 3 सैकड़ा नाले वर्षा के दौरान आफत का सबब बन सकते हैं। दरअसल वर्षा पूर्व शहर के नालों की साफ सफाई कराये जाने की समय सीमा निकल चुकी है और शहर सरोकार के इस अहम मामले में नगर निगम अब तक बुरी तरह नाकाम रहा है।

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