सड़क हादसे में घायल दूसरे युवक ने भी दम तोड़ा आक्रोशित परिजनों ने 3 घंटे तक लगाया जाम

ग्वालियर. नशे में तेज रफ्तार ड्राइविंग ने 2 घरों की खुशियां छीन लीं। एसपी दफ्तर के पास मंगलवार की रात तेज रफ्तार कार की टक्कर से घायल दूसरे युवक गोवर्धन आदिवासी (25) निवासी रामवाटिका के पास ने भी दम तोड़ दिया। मंगलवार को गोवर्धन के साले रमेश पुत्र दलपत गौंड (19) की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। एक साथ 2 घरों के चिराग बुझ जाने से आक्रोशित परिजनों और उनके रिश्तेदारों ने एसपी दफ्तर के नजदीक जहां एक्सीडेंट हुआ था उसी जगह शव रखकर चक्काजाम कर दिया। दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक किए गए चक्काजाम से सिटी सेंटर रोड से एजी ऑफिस पुल और मोटल तानसेन तक टैफिक अवरूद्ध हो गया। मृतकों के परिजन 4 लाख रुपए की आर्थिक मदद और परिवार के पालन पोषण के लिए एक परिजन को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे थे। बीच में कई बार पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया जिस पर परिजन और पुलिस के बीच झड़प भी हुई।
परिजनों के समर्थन में कांग्रेस नेता मितेन्द्र सिंह भी पहुंचे। वह परिजनों को एडीएम संदीप केरकेट्टा के पास लेकर पहुंचे। एडीएम ने आश्वासन दिया कि शासन की ओर से मिलने वाली 25 हजार रूपए की आर्थिक मदद दी जाएगी और नौकरी का प्रस्ताव भेजा जाएगा। तब जाकर परिजनों ने जाम खोला। चक्काजाम होने पर सीएसपी यूनिवर्सिटी धर्मराज मीणा, टीआई थाना यूनिवर्सिटी राजेन्द्र वर्मन पहुंचे थे।
ऐसे हुआ था हादसा
मंगलवार रात को सिटी सेंटर पर एसपी दफ्मर के नजदीक तेज स्पीड़ में आ रही कार एमपी 07 सीबी 9374 बेकाबू होकर डिवाइडर पर चढ़ गई फिर एक खंभे में टक्कर मारने के बाद सांड में टक्कर मारी। रमेश की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। गोवर्धन को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गोवर्धन ने भी देर रात दम तोड़ दिया। कार चला रहे कार्तिक जैन को लोगों ने पकड़कर पीटा और यूनिवर्सिटी थाना पुलिस के हवाले कर दिया था।
पति और भाई की लाश देखकर बेसुध हो गई शांति
गोवर्धन की पत्नी शांति को रात को नहीं बताया गया था कि उसका पति भी दुनिया से विदा हो गया है। भाई के गम में वह बिलख रही थी। सुबह जैसे ही पति और भाई की लाश देखी तो बेसुध होकर गिर पड़ी। सड़क पर लाश के पास बेसुध बैठी रही उसकी मासूम बेटी पूछ रही थी कि पापा को क्या हो गया। गोवर्धन और शांति के 2 बेटियां हैं। शांति को 8 माह का गर्भ भी है। उधर रमेश भी अपने माता पिता का घर चलाने में हाथ बंटाता था उसका एक बड़ा भाई भी है । घर में सबसे छोटा होने की वजह से वह माता पिता का लाड़ला था।

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