शिक्षक दिवस – गुरू का सम्मान सबसे बड़ा सम्मानःदंदरौआ महाराज

ग्वालियर। जन उत्थान न्यास के तत्वाधान में आज शिक्षक दिवस के अवसर पर ग्वालियर व्यापार मेला मैदान में 31 सौ शिक्षक – शिक्षिकाओं को बेहद गरिमामय पूर्ण कार्यक्रम में शॉल, श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दंदरौआ सरकार के महंत श्रीश्री 1008 संत रामदास महाराज उपस्थित रहें, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षाविद् उमाशंकर पचौरी मौजूद थे। विधायक सुमावली सत्यपाल सिंह सिकरवार (नीटू), पूर्व पार्षद श्रीमती विद्यादेवी कौरव, ज्योतिशविद् सतेन्द्र सिंह भदौरिया, एड. धीरेन्द्र सिंह चौहान, भाजपा नेता राजेश्वर राव आदि मंचासीन रहे। अतिथियों ने मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण कर कार्यक्रम का शुभांरभ किया। मंचासीन अतिथियों का स्वागत जन उत्थान न्यास के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता डॉ. सतीशसिंह सिकरवार, सचिव चन्द्रप्रकाश गुप्ता, कोषाध्यक्ष अवध सिंह धाकरे, संयुक्त सचिव अवधेश कौरव, श्रीमती रश्मि पुरोहित, श्रीमती हनी शर्मा, न्यासी आदित्य सिंह सिकरवार ने पुष्पहार पहनाकर किया। कार्यक्रम की रूपरेखा और स्वागत भाषण देते हुये भाजपा नेता न्यास के अध्यक्ष डॉ. सतीशसिंह सिकरवार ने कहा कि आप सब शिक्षक-शिक्षिकाओं का मैं चरणवंदन करते हुये प्रणाम करता हॅू, आप सब के सहयोग से यह आयोजन सफल रहा है। उन्हांेने कहा कि गुरू ही देश की युवा पीढी का निर्माण करते हैं, जो देश में विभिन्न क्षेत्रों में छात्र अपने शहर अपने गुरू और माता-पिता का नाम रोशन करते हैं। उन्होने कहा कि सच्चा शिष्य वहीं है जो गुरू से छल-कपट न करे। आज हम सब आपका सम्मान करके अपने आपको गौरान्वित महसूस कर रहे हैं।
इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दंदरौआ महाराज ने कार्यक्रम की सरहाना करते हुये कहा कि सतीश सिकरवार समाज के हर क्षेत्र में और लोगों को प्रेरणा देने वाले कार्य कर रहे है। गरीब का ईलाज हो, गरीब कन्याओं का विवाह हो, शिक्षकों का सम्मान हो जैसे अनेक कार्य उनके द्वारा किये जा रहे हैं। मैं उनको आर्शीवाद देता हॅू कि वे इसी तरह और बडे-बडे आयोजन करते रहें, उन पर हनुमान जी की कृपा हमेशा बनी रहेगी। महाराज जी ने कहा कि गुरू ही अंधकार से समाज को उजाले कि ओर ले जाता है और समाज का पथ प्रदर्शक होता है। गुरू का सम्मान करने से बडा कोई सम्मान नहीं होता हैं, गुरू शिष्य के विकार को खत्म करते हैं। उन्होने कहा कि शिक्षित समाज ही उन्नति करता है। मैं सभी गुरूजनों से आव्हान करता हूॅ कि वो बच्चों को पढाई के साथ-साथ संस्कारबान बनायें।
इससे पहले कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शिक्षाविद् उमाशंकर पचौरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरू का दर्जा परमात्मा से बढकर हैं, गुरूजनों से आर्शीवाद ही छात्र-छात्राओं को काबिल बनाता है। गुरू का सम्मान करने से व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि श्रृद्धा, विश्वास पर खरा उतरकर ही व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है, गुरू सबसे बड़ी शक्ति है और गुरूजी का सम्मान करके जीवन सार्थक बन जाता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में सुमावली विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार (नीटू) ने इस मौके पर कहा कि एकलव्य और द्रोणाचार्य ने गुरू-षिश्य परम्परा का निर्वाह किया है और भारत ही एक मात्र देश है जहां आज भी गुरू शिष्य परम्परा जीवित है। उन्होने कहा कि शिक्षक समाज व देश का निर्माण करता है। उन्होने कहा कि शिक्षक का दायित्व है कि वह अपने सबसे श्रेष्ठ कार्य करना बच्चों को शिक्षित करना है। उन्होने कहा कि समाज में शिक्षक का और बार्डर पर सैनिक का बड़ा रोल रहता है।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि राजेष्वर राव ने कहा कि डॉ. सतीश सिकरवार ने जन सेवा के माध्यम से समाज में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है, उन्होंने कहा कि बीते रोज इसी मैदान पर 40 हजार बहनों का सम्मान किया गया था जो अद्भुत था। आज हमारे गुरूजन यहां सम्मानित हो रहे हैं, यह खुशी का पल है। उन्होने कहा कि आप सब डॉ. सिकरवार को चाणक्य के रूप में आर्शीवाद दें, क्योंकि चाणक्य नही होते तो चन्द्रगुप्त नही होते। उन्होने कार्यक्रम की सराहना करते हुये कहा कि समाज सेवा के क्षेत्र में जो कार्य वह कर रहे हैं, वह अनुकरणीय है जितनी तारीफ की जाए कम है। इस मौके पर श्रीमती विद्यादेवी कौरव, ज्योतिशविद् सतेन्द्र सिंह भदौरिया ने भी विचार व्यक्त किये और शिक्षक रघुराज शर्मा ने डॉ. सिकरवार को सर्म्पित अपनी रचना का काव्यपाठ किया। कार्यक्रम का संचालन महेन्द्र शुक्ला ने एवं आभार अवधेश कौरव ने व्यक्त किया।

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