कांग्रेस ने महापौर और भाजपा प्रत्याशी शेजवलकर पर लगाये आरोप

ग्वालियर 6 मई । आज हम ग्वालियर शहर के बदत्तर हालात के दृष्टिगत जनहित के कुछ बुिनयादी सवालों और पुष्ट आरोपों को आपके साथ साझा करना चाहते हैं, इस आशा और उम्मीद के साथ कि मान. महापौर जी की जबावदेही जनता तक पहुचंे। सत्ता में बैठे भाजपा द्वारा सरकार चलाने का एक सूत्र ‘‘मिनिमम गवर्मेंट मेग्जीमम गवरनेंस‘‘ के तहत सरकार चलाने का वादा आमजन के समक्ष प्रस्तुत किया था।
शहर में नगरपालिक निगम तीन चौथाई के महापौर विवेक शेजवलकर की सरकार है, शहर विकास के लिये प्रमुख रूप से यही लोग जबावदेह थे, किंतु स्पष्ट है कि सत्ताधीशों द्वारा सरकार चलाने का जो सूत्र आमजन के समक्ष प्रस्तुत किया था, उसके विपरीत मेग्जिमम गवर्मेंट, मिनिमम गर्वेनेंस पर कार्य किया गया।
महापौर पर यह हैं आरोप
जनवरी 2015 में हुए चुनाव में अपने घोषणा पत्र में घोषणा की थी कि किसी भी भवन स्वामी पर कोई टैक्स नही बढ़ायेंगे। किंतु नगर चुनाव जीतने के पश्चात टेक्स में दो बार बढ्ढोत्तरी की गई, जो लगभग 38 से 72 प्रतिशत तक है। एडीबी से लगभग 120 करोड़ रूपया शुद्ध पेयजल प्रदान करने के लिये ग्वालियरवासियों केा कर्ज में डुबो देने के बावजूद भी आज ग्वालियरवासी गंदा पीला पानी पीने को मजबूर हो रहे है, जिससे कई प्रकार की संक्रांमक बीमारी फैल रही है और जिसके कारण कई बार छोटे बच्चो को जान से हाथ भी धोना पड़ा।
शहर के बाहरी क्षेत्रो में चारो ओर लगभग 6 लाख टन कचरा खुला पड़ा है, जिससे वायु प्रदुषण व जल प्रदुषण हो रहा है। जिससे शहर के बाहर षिवपुरी लिंक रोड पर बच्चो के कई स्कूल है जहां बच्चो को गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व में एकेसी डवलपर्स ने 28 करोड़ रू का प्लांट लगाकर केदारपुर में लंेडफिल साईट चालू की थी, किंतु विवेक शेजवलकर जी के ही कार्यकाल में उक्त खाद्य कारखाने में निगम अधिकारियों की संाठगांठ से प्लांट पर आग लगवाई गई और प्लांट से गुपचुप रूप सारी मशीनो को ठेकेदार हटा दिया गया और इंश्योंरेंस कपंनी से क्लेम ले लिया गया, जिसमें निगम को करोड़ो रू की हानि हुई। महपौर विवेक शेजवलकर द्वारा 2017-18 के बजट में नवं सवंत्सर महोत्सव के आयोजन हेतु 30 लाख रू काप्रावधान किया था, पंरंतु 36 लाख 55 हजार 837 रू खर्च किये गये। वर्ष 2017-18 के बचट में अतिथि सत्कार व्यय 10 लाख था, किंतु खर्चा 17 लाख 86 हजार 757 रू खर्च किये गये। निगम कार्यालयो की सुरक्षा व्यवस्था हेतु बजट वर्ष 2017-18 में 2 करोड़ 50 लाख का प्रावधान था किंतु खर्चा 6 करोड़ 80 लाख रू किया गया। नगर पालिका निगम परिश्रमिक तथा भत्ते नियम 1995 (3) द्वारा महापौर को 2500 रू प्रतिमाह सत्कार भत्ते का प्रावधान है लेकिन निगम के खजाने से लाखो रू सत्कार के नाम पर खर्च किये जा रहे है जो नियमविरूद्ध है।
स्मार्ट सिटी
मई 2016 में ग्वालियर को स्मार्ट सिरिज चेंलेज के रांउड दो में चुना गया था। किंतु स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ो रूपया फिजूल खर्च किये गये और विकसित पार्को में विकास के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार किया गया।

नेहरू पार्क 4.10 करोड रू 2. लेडिज पार्क 2.89 करोड़ रू। 3. कटोरा ताल 2.17 करोड़ रू। 4. शिवाजी पार्क 1.32 करोड़ रू। जबकि उपरोक्त सभी पार्क पूर्व से ही विकसित थे। बाल भवन पर रेनवाटर हॉर्वेस्टिंग पिट्स का निर्माण किया गया, जिस पर 20 लाख रू खर्च किया गया, जबकि वहां मात्र 1 बड़ा गड्डा बनाकर औपचारिकता की गई।
पब्लिक बाईक शेयरिंग पर 5.06 करेाड़ रू खर्च किया गया और शहर में कई जगह साईकल ट्रेक के नाम पर निर्माण किया गया, जबकि आज तक कहीं भी साईकल ट्रेक न तो निर्माण ही हो पाया, और न ही उन पर आज तक साईकल चल पाई। बीएमएस साईनेस पर 3 करोड़ रू. खर्च हो जाने के बावजूद भी साईनेस पर जनता को सही जानकारी प्राप्त नही हो पा रही है। टाउन हॉल .69 करोड़ रू खर्च किए जा चुके है पूर्व में इस ही टाउन हॉल पर नगर निगम द्वारा 1.50 करोड़ रू. खर्च किया जा चुका था जिसकी कोई जानकारी नही बताई जा रही, और अब वर्तमान में स्मार्ट सिटी फंड से कार्य कराया जा रहा है।
अमृत योजना
अमृत योजना के नाम पर ग्वालियर में आए फंड को ठिकाने लगाने के लिये महापौर विवेक शेजवलकर द्वारा अपने चहेते अधिकारियों को वापस बुलाकर उक्त फंड को ठिकाने लगाया जा रहा है।

अमृत योजना में पेयजल पर 321 करोड़ रू.।
सीवर लाईन डालने के नाम पर 373 करोड़ रू।
सॉलिड वेस्ट मेंनेजमेंट 256 करोड़ रू।
उपरोक्त तमाम योजनांयों में महापौर के द्वारा किये गये नियमविरूद्ध तरीके से किए गए कार्यो की शिकायत होने पर मप्र शासन द्वारा 21 दिसंबर को जांच के आदेश दिए गए, राज्य शासन के द्वारा भेजी गई जांच टीम द्वारा महापौर द्वारा नियमविरूद्ध की गई अमृत योजना पर खर्च, सीवर, पानी, पार्क निर्माण के भुगतान, वर्कशॉप के वाहनो पर डीजल खर्च, दुकानो की लीज आवंटन न होने एवं प्रीमियम राशि न मिलने हुए 8 करोड़ के नुकसान आदि लगभग 16 बिंदुओ की जांच की गई जिसमें महापौर को नोटिस जारी किए गए, जांच से बचने के लिये महापौर विवेक शेजवलकर द्वारा मान. न्यायालय में गए किंतु मान. न्यायालय ने इनकी अपील को खरिज कर जांच याथवत रखते हुए जांच में सहयोग करने के निर्देश दिये।
मप्र में कांग्रेस की सरकार बनते ही से शहर की जर्जर पड़ी सड़के जिन पर आए दिन दुर्घटनांए हो रही थी, उनका निर्माण कांग्रेस विधायको द्वारा कराना शुरू कर दिया गया, जिससे आज शहर सड़को की स्थिती पहले से बेहतर होना शुरू हो गई, लोकसभा चुनाव के बाद शहर का चहुंमुखी विकास किया जायेगा।

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