मरीना बीच पर ही होगा करूणानिधि का अंतिम संस्कार, द्रमुक के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला

चेन्नई. 5 बार तमिलनाडु के सीएम और 50 वर्ष द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के प्रमुख रहे एम करूणानिधि (94 वर्ष) का अंतिम संस्कार चेन्नई के मरीना बीच पर ही होगा। प्रदेश की अन्नाद्रमुक सरकार और द्रमुक के बीच समाधिस्थल को लेकर मंगलवार की रात से चल रही कानूनी लड़ाई बुधवार की सुबह ही समाप्त हो गयी। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि समाधिस्थल मरीना बीच पर बनाया जायेगा। करूणानिधि ने मंगलवार की शाम को कावेरी अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिये यहां के राजाजी हॉल में रखा गया है।
द्रमुक पूर्व सीएम एमजी रामचन्द्रन और जयललिता की तरह मरीना बीच पर उनका समाधिस्थल चाहती थी, सरकार ने वहां स्थान देने से मनाकर दिया था। स्मारक बनाने के लिये सरकार ने गांधी मण्डम् में 2 एकड़ जगह देने की पेशकश की थी। समर्थक रात को ही हाईकोर्ट पहुंच गये थे। देर रात 11 बजे कार्यवाहक चीफ जस्टिस के घर पर ही 2 जजों की बेंच ने सुनवाई शुरू की थी, लगभग 2 घंटे सुनवाई चली। सरकार ने जवाब देने के लिये समय मांगा तो कोर्ट में सुनवाई बुधवार की सुबह तक स्थगित कर दी थी, सुबह सुनवाई शुरू हुई तो तमिलनाडु सरकार ने अपने शपथ पत्र में कहा कि जब करूणानिधि सीएम थे, तब प्रोटोकाकॅल बताने के बाद भी उन्होंने पूर्व सीएम जानकी रामचन्द्रन की समाधि के लिये जमीन नहीं दी थी। द्रमुक ने इसे बदले की राजनीति बता दिया।
सरकार का रवैया भेदभावपूर्ण रहा-द्रमुक
द्रमुक के एक नेता ने कहा है कि हमने हाईकोर्ट को बताया कि कैसे राज्य सरकार जयललिता के स्मारक के लिये 3400 से 3500 वर्गफीट दे सकती है, लेकिन हमें 6 फीट की जगह देने से मना कर ही है, दरअसल, सरकार भेदभाव कर रही है। अन्नाद्रमुक सरकार यहां जयललिता का 50 करोड़ रूपये का स्मारक बनाने जा रही है।
सरकार उदारता पूर्वक रवैया दिखाये- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा है कि जयललिता की तरह करूणानिधि भी तमिल लोगों की आवाज थे, ऐसे में उन्हें मरीना बीच पर स्थान दिया जाना चाहिये। वहीं, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने बताया है कि तमिलनाडु सरकार को ऐसे मौके पर राजनीति नहीं करनी चाहिये ।

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